भारतीय शेयर बाजार में अगस्त 2026 के दौरान ब्लॉक डील्स की बाढ़ आ गई है। कुल ट्रांजैक्शन वॉल्यूम **₹30,957 करोड़** तक पहुंच गया है, जिसमें Billionbrains Garage Ventures (Groww) और Welspun Corp जैसी बड़ी कंपनियों के प्रमोटर्स ने अपनी हिस्सेदारी बेचकर मुनाफा वसूला है।
अगस्त 2026 में भारतीय इक्विटी मार्केट में ब्लॉक डील एक्टिविटी ने पिछले 14 महीनों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। 26 अगस्त तक कुल वॉल्यूम ₹30,957 करोड़ के आंकड़े को पार कर गया है। इस भारी बिकवाली के पीछे दो मुख्य कारण हैं—पहला, बाजार की तेजी के बाद प्रमोटर्स द्वारा अपना मुनाफा (Profit) बुक करना और दूसरा, रेगुलेटरी नियमों का पालन करना।
प्रमुख कंपनियों पर असर
इस बिकवाली का सीधा असर कई बड़े स्टॉक्स पर पड़ा है। 'Groww' की पैरेंट कंपनी Billionbrains Garage Ventures में 2.1% इक्विटी का लेन-देन हुआ, जिसकी वैल्यू ₹2,500 करोड़ रही। इस खबर के बाद स्टॉक में 3% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। वहीं, Welspun Corp के एमडी विपुल माथुर और प्रमोटर ग्रुप ने 2.4% हिस्सेदारी (लगभग 63 लाख शेयर) ₹1,433 करोड़ में बेची, जिससे शेयर की कीमतों पर भारी दबाव देखा गया।
रेगुलेटरी अनुपालन (Regulatory Compliance)
सब कुछ केवल मुनाफे की बुकिंग नहीं है। Prudential Corporation Holdings ने 27 अगस्त 2026 को ICICI Prudential AMC में अपनी 2% हिस्सेदारी बेचने का ऐलान किया है। यह कदम SEBI के 'न्यूनतम पब्लिक शेयरहोल्डिंग' नियमों को पूरा करने के लिए उठाया गया है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
बाजार इस भारी बिकवाली को कैसे संभाल रहा है? फिलहाल म्यूचुअल फंड्स ने मुख्य खरीदार (Buyer) की भूमिका निभाई है, जिससे बड़े करेक्शन से बाजार को राहत मिली है। हालांकि, मौजूदा वैल्यूएशन पर इतनी बड़ी सप्लाई का आना यह संकेत देता है कि शॉर्ट टर्म में स्टॉक्स पर दबाव बना रह सकता है। अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या कंपनियों के आने वाले नतीजे मौजूदा महंगे वैल्यूएशन को सही साबित कर पाएंगे या नहीं।
