Adani Group की चार कंपनियों ने SEBI के साथ चल रहे शेयरहोल्डिंग नियमों से जुड़े विवाद को सुलझा लिया है। **₹1.48 करोड़** के सेटलमेंट के साथ, साल 2020 से लंबित यह कानूनी प्रक्रिया अब समाप्त हो गई है।
विवाद का अंत
Adani Group की चार प्रमुख लिस्टेड कंपनियों—Adani Enterprises, Adani Power, Adani Ports and Special Economic Zone और Adani Energy Solutions—ने मार्केट रेगुलेटर SEBI के साथ चल रहे विवाद पर पूर्ण विराम लगा दिया है। इन कंपनियों ने 'मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग' (MPS) नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामले को बंद करने के लिए सामूहिक रूप से ₹1.48 करोड़ का सेटलमेंट शुल्क भरा है। गौरतलब है कि इस मामले की जांच SEBI अक्टूबर 2020 से कर रही थी।
सेटलमेंट के मायने
भारतीय शेयर बाजार के नियमों के अनुसार, हर लिस्टेड कंपनी के लिए 25% पब्लिक शेयरहोल्डिंग अनिवार्य है, ताकि पारदर्शिता और लिक्विडिटी बनी रहे। Adani Group ने इस सेटलमेंट के जरिए बिना किसी गलती को स्वीकार किए (बिना आरोप माने या नकारे) कानूनी कार्यवाही को बंद करने का रास्ता चुना है। प्रत्येक कंपनी पर ₹37.05 लाख का बोझ पड़ा है, जो इन बड़ी कंपनियों के लिए एक छोटा निवेश है, लेकिन इससे लंबे समय से चल रही रेगुलेटरी अनिश्चितता खत्म हो गई है।
निवेशकों के लिए संकेत
हालांकि, रेगुलेटर ने यह भी साफ किया है कि यदि भविष्य में जमा की गई जानकारी गलत पाई जाती है, तो वे फिर से केस खोल सकते हैं। फिलहाल, यह कदम निवेशकों के लिए बड़ी राहत है क्योंकि ग्रुप पर लटकी रेगुलेटरी तलवार अब हट चुकी है। SEBI की इंटरनल कमेटी और हाई-पावर्ड पैनल की मंजूरी के बाद, अगस्त में इस सेटलमेंट पर मुहर लगाई गई थी, जिससे अब सभी पुरानी एन्फोर्समेंट कार्यवाही बंद हो गई हैं।
