Advertising Standards Council of India (ASCI) ने विज्ञापनों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल को लेकर कड़े नियम जारी किए हैं। अब तीन महीने बाद से ब्रांड्स को अपने विज्ञापनों में AI जनरेटेड कंटेंट का खुलासा करना अनिवार्य होगा।
नियम का दायरा और अनुपालन (Compliance)
ASCI द्वारा जारी किए गए नए गाइडलाइन्स का मुख्य उद्देश्य विज्ञापनों में पारदर्शिता लाना है। 29 सितंबर, 2026 की घोषणा के 3 महीने बाद से यह नियम प्रभावी हो जाएगा। इसके तहत, यदि किसी विज्ञापन में AI-जनरेटेड इन्फ्लुएंसर, किसी व्यक्ति की डिजिटल कॉपी या पूरी तरह से बनावटी प्रोडक्ट सेट दिखाया गया है, तो ब्रांड को उसके 'AI ओरिजिन' का डिस्क्लेमर देना होगा।
क्या छूट दी गई है?
रेगुलेटर ने स्पष्ट किया है कि क्रिएटिव प्रोसेस में आने वाली सामान्य तकनीकी चीजें जैसे कि कलर करेक्शन, लाइटिंग एडजस्टमेंट, नॉइज रिडक्शन और माइनर ब्लेमिश हटाने पर कोई डिस्क्लेमर नहीं देना होगा। इसी तरह, ऑटोमेटेड सबटाइटल और बैकग्राउंड के छोटे-मोटे डेकोरेटिव एलिमेंट्स को भी दायरे से बाहर रखा गया है। यह छूट केवल उन्हीं चीजों पर है जो कंज्यूमर को गुमराह नहीं करतीं।
कंपनियों के लिए चुनौती
यह कदम FMCG, ई-कॉमर्स और एड-टेक सेक्टर की कंपनियों के लिए बड़ा बदलाव लेकर आया है। अब इन कंपनियों को अपनी क्रिएटिव एजेंसियों और टेक वेंडर्स के साथ मिलकर वर्कफ्लो का ऑडिट करना होगा। यदि कोई कंपनी इन नियमों का पालन नहीं करती है, तो उसे ASCI कोड और सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) के तहत कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
डीपफेक पर सख्ती जारी
ASCI ने साफ कर दिया है कि लेबल लगाना ही काफी नहीं है। डीपफेक, किसी की आवाज या पहचान का बिना अनुमति इस्तेमाल और फर्जी टेस्टिमोनियल्स पर पूरी तरह रोक रहेगी। निवेशकों को अब इस बात पर नजर रखनी होगी कि कंपनियां इन नियमों के साथ खुद को कैसे ढालती हैं और इस अनुपालन (Compliance) का उनके मार्केटिंग बजट पर क्या असर पड़ता है।
