AIF Industry: FEMA 2026 के नए नियमों से घबराया बाजार, विदेशी निवेश पर लग सकती है लगाम

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AuthorNeha Patil|Published at:
AIF Industry: FEMA 2026 के नए नियमों से घबराया बाजार, विदेशी निवेश पर लग सकती है लगाम

Alternative Investment Funds (AIF) ने FEMA 2026 के ड्राफ्ट नियमों का विरोध किया है। इंडस्ट्री को डर है कि अगर फंड्स को 'फॉरेन-कंट्रोल्ड' माना गया, तो स्टार्टअप्स में निवेश और कंप्लायंस की राह मुश्किल हो जाएगी।

नए ड्राफ्ट से क्यों बढ़ा तनाव?

RBI द्वारा लाए गए ड्राफ्ट 'Foreign Exchange Management (Foreign Investment) Rules, 2026' के बाद से ही एसेट मैनेजमेंट कंपनियों की चिंताएं बढ़ गई हैं। अब तक AIF को घरेलू माना जाता था अगर उसका मैनेजर और स्पॉन्सर भारतीय हो, चाहे पैसा कहीं से भी आया हो। लेकिन नया ड्राफ्ट कहता है कि अगर फंड का बड़ा हिस्सा विदेशी निवेशकों से है, तो उसे 'Foreign Controlled Entity' (FCE) माना जाएगा।

FDI और कंप्लायंस का जाल

अगर AIFs को फॉरेन-कंट्रोल्ड मान लिया जाता है, तो उन पर FDI के कड़े नियम लागू होंगे। इसमें डिफेंस और रिटेल जैसे संवेदनशील सेक्टरों के लिए तय 'सेक्टोरल कैप्स' (Sectoral Caps) का पालन करना अनिवार्य हो जाएगा। इसके अलावा, Press Note 3 के तहत भी उन्हें कड़ी जांच और लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है, जिससे डील्स में देरी होना तय है।

इंडस्ट्री की मांग क्या है?

इंडस्ट्री के दिग्गज SEBI, RBI और फाइनेंस मिनिस्ट्री के साथ लगातार चर्चा कर रहे हैं। उनका तर्क है कि निवेश का फैसला लेने वाली संस्था (मैनेजर/स्पॉन्सर) के आधार पर ही फंड की नेशनलिटी तय होनी चाहिए। इंडस्ट्री ने सुझाव दिया है कि भारतीय वित्तीय संस्थानों द्वारा प्रायोजित फंड्स को इससे छूट मिलनी चाहिए, ताकि घरेलू स्टार्टअप्स में बिना किसी रुकावट के पैसा आता रहे।

31 अगस्त, 2026 तक चले पब्लिक कंसल्टेशन के बाद अब नजरें इस बात पर हैं कि RBI फाइनल नोटिफिकेशन में इंडस्ट्री की इन चिंताओं को कितनी जगह देता है। निवेशकों के लिए यह डेवलपमेंट इसलिए जरूरी है क्योंकि इसी से भविष्य में कैपिटल डिप्लॉयमेंट की रफ्तार तय होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.