साल 2021 के बाद आए बड़े IPOs में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए झटका है। आंकड़े बताते हैं कि 11 सबसे बड़े पब्लिक ऑफर्स में से 7 वर्तमान में अपने इश्यू प्राइस से नीचे ट्रेड कर रहे हैं, जिससे उनकी मार्केट वैल्यू में **15%** से ज्यादा की गिरावट आई है।
बड़े-बड़े IPOs को लेकर बाजार में जो जोश दिखता है, उसे हालिया आंकड़ों ने हकीकत का आईना दिखाया है। डेटा के अनुसार, साल 2021 के बाद ₹9,500 करोड़ से ज्यादा जुटाने वाली 11 बड़ी कंपनियों में से 7 के शेयर अपने लिस्टिंग प्राइस से भी नीचे कारोबार कर रहे हैं। इस गिरावट के चलते इन कंपनियों की कुल मार्केट वैल्यू में 15.3% का नुकसान हुआ है और यह घटकर करीब ₹88,979 करोड़ के स्तर पर आ गई है।\n\n### समस्या की जड़: ओवर-प्राइसिंग (Aggressive Pricing)\n\nज्यादातर मामलों में समस्या IPO के दौरान तय की गई महंगी कीमत (Pricing) से शुरू होती है। जब कंपनियां अपने शेयर की कीमत बहुत ज्यादा 'परफेक्ट' तय कर देती हैं, तो सेकेंडरी मार्केट में उसके पास बढ़ने की गुंजाइश बहुत कम रह जाती है। अक्सर निवेशक नामी ब्रांड के नाम पर फिदा होकर कंपनी की असली फाइनेंशियल सेहत और ग्रोथ की क्षमता को नजरअंदाज कर देते हैं। जब बाजार का मिजाज बिगड़ता है या कंपनी उम्मीदों पर खरी नहीं उतरती, तो शेयर की कीमत धड़ाम से गिरकर उसके असल परफॉरमेंस के बराबर आ जाती है।\n\n### कुछ प्रमुख उदाहरण:\n\n* Swiggy: यह फिलहाल अपने इश्यू प्राइस से 35% नीचे ट्रेड कर रहा है।\n* One 97 Communications (Paytm): यह अपने लिस्टिंग प्राइस से 22% नीचे है।\n* LIC और NTPC Green Energy: इन बड़े नामों के शेयर भी 10% से 17% के बीच टूट चुके हैं।\n* National Stock Exchange: यह भी संघर्ष कर रहा है और अपने ₹1,785 के इश्यू प्राइस के मुकाबले ₹1,769.30 पर कारोबार कर रहा है।\n\n### निवेशकों के लिए सबक\n\nसिर्फ ब्रांड का नाम देख लेना लंबी अवधि में मुनाफा कमाने की गारंटी नहीं है। इसके उलट, जिन कंपनियों ने वैल्यूएशन के मामले में निवेशकों के लिए जगह छोड़ी (यानी सस्ते शेयर दिए), उन्होंने बेहतर प्रदर्शन किया है। उदाहरण के लिए, LG Electronics India और ICICI Prudential Asset Management Company ने क्रमशः 53% और 50% का रिटर्न दिया है।\n\nनिवेशकों के लिए यह स्पष्ट चेतावनी है: बड़े IPOs के नाम पर अंधे होकर निवेश न करें। आगे चलकर निवेश करने से पहले कंपनी का प्रॉफिट, कर्ज का स्तर (Debt levels) और जिस कीमत पर शेयर मिल रहा है, उसका सावधानी से विश्लेषण करना अनिवार्य है।
