नई दिल्ली में होने वाले BRICS समिट के चलते 57वीं GST काउंसिल की बैठक को आगे बढ़ा दिया गया है। पहले यह बैठक 12 सितंबर को होनी थी, लेकिन अब यह **7 अक्टूबर 2026** को आयोजित होगी। इस देरी के कारण ITC रिफॉर्म्स और टैक्स लिटिगेशन जैसे अहम मुद्दों पर फैसला भी फिलहाल लटक गया है।
बैठक क्यों टली?
18वें BRICS समिट के चलते नई दिल्ली के भारत मंडपम में भारी सुरक्षा और लॉजिस्टिकल बदलाव किए गए हैं, जिसके कारण सरकार ने GST काउंसिल की बैठक की तारीख बदलने का फैसला किया है। इस दौरान शहर में सरकारी दफ्तरों और स्कूलों में छुट्टी का ऐलान भी किया गया है। यह फैसला काफी अहम है क्योंकि काउंसिल की बैठक में होने वाली देरी से कारोबारियों के कई फैसले रुक गए हैं।
वर्किंग कैपिटल और टैक्स विवाद पर असर
निवेशकों और ऑटो डीलर्स की नजरें सबसे ज्यादा इस बात पर टिकी हैं कि सरकार 'कंपनसेशन सेस' (Compensation Cess) के फंदे को कैसे सुलझाती है। FADA ने सुप्रीम कोर्ट में एक केस दायर किया है, जिसमें ₹2,500 करोड़ के क्रेडिट रिफंड की मांग की गई है जो इलेक्ट्रॉनिक लेजर में फंसे हुए हैं। जब तक काउंसिल इस पर कोई स्पष्ट नीति नहीं बनाती, ऑटो रिटेल सेक्टर का कैश फ्लो प्रभावित होता रहेगा।
साथ ही, इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) में बदलाव की भी उम्मीद है। फिलहाल, अगर कोई सप्लायर टैक्स जमा करने में चूक करता है, तो उसका सीधा नुकसान खरीदार को भुगतना पड़ता है। काउंसिल इन नियमों को आसान बनाने पर विचार कर रही है ताकि कंपनियों पर एडमिनिस्ट्रेटिव बोझ कम हो सके।
रजिस्ट्रेशन और अन्य सुधार
काउंसिल उन 35% बिजनेस के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को सरल बनाने पर भी काम कर रही है जो अभी तक पुराने नियमों के दायरे में थे। प्रस्ताव यह है कि अगर कोई कंपनी महीने में ₹2.5 लाख से ज्यादा का टैक्स क्रेडिट ट्रांसफर करती है, तो उसके लिए डॉक्यूमेंटेशन स्टैंडर्ड तय किए जाएंगे। इसके अलावा, आउटडोर कैटरिंग, हेल्थ सर्विस और क्लब मेंबरशिप जैसे खर्चों पर ITC की राहत पर भी 7 अक्टूबर को होने वाली बैठक में स्पष्टता मिल सकती है।
