FY26 में भारतीय स्टार्टअप्स ने **47** IPO लॉन्च किए, जो पिछले साल के मुकाबले **52%** अधिक है। अब कंपनियों के पब्लिक होने के साथ ही निवेशकों का ध्यान आक्रामक ग्रोथ से हटकर टिकाऊ मुनाफे (Sustainable Profit) और बेहतर कॉर्पोरेट गवर्नेंस पर शिफ्ट हो गया है।
भारतीय टेक सेक्टर में फाइनेंशियल ईयर 2026 में रिकॉर्ड 47 IPO आए, जो पिछले साल की तुलना में 52% की बड़ी बढ़ोतरी है। यह बदलाव स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए एक बड़े टर्निंग पॉइंट की तरह है, जहां कंपनियां अब प्राइवेट वेंचर कैपिटल की फंडिंग से निकलकर पब्लिक मार्केट के निवेशकों के प्रति जवाबदेह हो गई हैं।
क्या बदल रहा है?
पहले स्टार्टअप्स का पूरा फोकस कस्टमर एक्विजिशन और मार्केट शेयर बढ़ाने पर होता था, चाहे उसके लिए उन्हें भारी नुकसान ही क्यों न उठाना पड़े। लेकिन अब पब्लिक मार्केट के निवेशक एक अलग उम्मीद रखते हैं। उन्हें अब कंसिस्टेंट फाइनेंशियल परफॉर्मेंस और बेहतर कैश फ्लो चाहिए। पब्लिक मार्केट में स्क्रूटनी बहुत ज्यादा होती है, जिससे कंपनियों के लिए अपनी पुरानी आदतों को बदलना आसान नहीं है।
प्रॉफिटेबिलिटी का चैलेंज
सबसे बड़ी चुनौती यह है कि लिस्टिंग के बाद मुनाफे को कैसे बरकरार रखा जाए। वेंचर कैपिटल अक्सर भविष्य की ग्रोथ के लिए सालों तक घाटा झेलने की छूट देता है, लेकिन शेयर मार्केट उन कंपनियों को बिल्कुल माफ नहीं करता जो सस्टेनेबल प्रॉफिट का रास्ता नहीं दिखा पातीं। अब निवेशक इस बात पर कड़ी नजर रख रहे हैं कि कंपनियां अपने खर्चों और एक्सपेंशन को कैसे बैलेंस करती हैं।
गवर्नेंस और ऑडिट की अहमियत
कंपनी के तौर पर अब फाइनेंशियल रिपोर्टिंग में पारदर्शिता अनिवार्य है। जरा सी चूक शेयर प्राइस में बड़ी गिरावट ला सकती है। इसी को लेकर बेंगलुरु में 'Moneycontrol Startup Conclave 2026' में बड़े लीडर्स जुटे हैं। इसमें OYO और Acko जैसे दिग्गजों के साथ ICICI Prudential Asset Management Company जैसे बड़े इन्वेस्टर्स भी शामिल हैं, जो यह तय कर रहे हैं कि किन कंपनियों में लॉन्ग-टर्म सरवाइव करने का दम है।
निवेशकों को सलाह है कि वे अब कंपनियों के तिमाही नतीजों पर बारीकी से नजर रखें। जो कंपनियां कर्ज मैनेज करने और ऑपरेटिंग एफिशिएंसी सुधारने में कामयाब होंगी, वही लंबी दौड़ का घोड़ा साबित होंगी।
