अंतरिक्ष की दुनिया से एक बुरी खबर आ रही है। Katalyst Space का एक अहम मिशन, जो NASA के Neil Gehrels Swift Observatory की लाइफ बढ़ाने के लिए भेजा गया था, अब नियंत्रण से बाहर हो गया है। LINK नाम का यह अंतरिक्ष यान, जो 3 जुलाई को लॉन्च हुआ था, रिएक्शन व्हील्स और थ्रस्टर में आई तकनीकी गड़बड़ियों के कारण बेकाबू हो गया है।
मिशन पर संकट के बादल
अंतरिक्ष में एक बड़ी महत्वाकांक्षी योजना पर गंभीर संकट मंडरा रहा है। Katalyst Space और NASA के बीच यह मिशन, जिसका मकसद Neil Gehrels Swift Observatory को एक ऊंची कक्षा में स्थापित कर उसकी कार्यअवधि बढ़ाना था, अब तकनीकी खराबी की वजह से अनियंत्रित हो गया है। 3 जुलाई को लॉन्च हुआ LINK अंतरिक्ष यान कई तकनीकी समस्याओं से जूझ रहा है, जिसके चलते यह अंतरिक्ष में बेकाबू होकर घूमने लगा है।
क्या हुई समस्या?
इस मिशन को Swift Observatory को, जो 2004 से काम कर रहा है, एक ऐसी कक्षा में पहुंचाना था जो इसके समय से पहले खत्म होने वाले जीवन को रोक सके। लेकिन, वीकेंड पर मिशन को बड़ा झटका लगा जब अंतरिक्ष यान के तीन रिएक्शन व्हील्स में से दो खराब हो गए। ये व्हील्स यान की स्थिरता और दिशा बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी होते हैं। इसके अलावा, थ्रस्टर सिस्टम में भी तकनीकी दिक्कतें सामने आई हैं।
इन खराबीयों के चलते यान तेजी से घूमने लगा है, जिससे ग्राउंड टीम के लिए स्थिर कम्युनिकेशन बनाए रखना मुश्किल हो गया है। यान का एंटीना अब लगातार पृथ्वी की ओर पॉइंट नहीं कर पा रहा है, जिससे डेटा भेजने में भारी दिक्कत आ रही है। अभी फ्लाइट कंट्रोलर्स वैकल्पिक थ्रस्टर्स का इस्तेमाल करके यान के घूमने की गति को धीमा करने और उसे कंट्रोल में लाने की कोशिश कर रहे हैं।
मिशन का महत्व और पृष्ठभूमि
यह मिशन इसलिए भी अहम है क्योंकि NASA ने पहली बार किसी निजी कंपनी के साथ मिलकर अपने स्पेस ऑब्जर्वेटरी की लाइफ बढ़ाने का यह काम सौंपा था। Swift Observatory वैज्ञानिक समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण है, जिसका इस्तेमाल ब्रह्मांड की क्षणिक घटनाओं की निगरानी के लिए किया जाता है। इस मिशन के जरिए इसकी कार्यअवधि बढ़ाना, बिना नया सैटेलाइट लॉन्च किए, एक किफायती तरीका माना जा रहा था।
LINK अंतरिक्ष यान बनाने वाली निजी कंपनी Katalyst Space ने हाल ही में जून में Fortitude Ventures और Geodesic Capital जैसे निवेशकों से $12 मिलियन का फंड जुटाया था। कंपनी को Swift Observatory की तत्काल जरूरत को पूरा करने के लिए तेजी से काम करते हुए यह अंतरिक्ष यान विकसित करना था। कंपनी के चीफ इंजीनियर Kieran Wilson ने पहले ही इस प्रोजेक्ट के हाई-रिस्क नेचर पर जोर दिया था, यह कहते हुए कि भले ही पर्याप्त फंड और विकास हो, जटिल अंतरिक्ष अभियानों में तकनीकी समस्याएं आ सकती हैं।
आगे क्या?
NASA और Katalyst Space ने पुष्टि की है कि सेकेंडरी थ्रस्टर्स की मदद से यान को स्थिर करने के शुरुआती प्रयासों में कुछ सकारात्मक संकेत मिले हैं, लेकिन मिशन अभी भी नाजुक स्थिति में है। अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी क्षेत्र के निवेशक और हितधारक इस बात पर नजर रखेंगे कि क्या टीम अंतरिक्ष यान पर पूरा नियंत्रण हासिल कर पाती है और ऑर्बिटल मैन्युवर को सफलतापूर्वक पूरा कर पाती है। स्टार्टअप की रियल-टाइम में इन हार्डवेयर समस्याओं को हल करने की क्षमता भविष्य के निजी-सार्वजनिक अंतरिक्ष सेवा साझेदारियों की सफलता के लिए एक महत्वपूर्ण मापदंड होगी।
