###政策 (Policy) और सरकारी मदद की कहानी
इकॉनोमिक सर्वे 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का स्पेस सेक्टर अब प्राइवेट प्लेयर्स के लिए खुल गया है। 2020 में स्पेस सेक्टर में लाए गए बड़े सुधारों और 2023 की इंडियन स्पेस पॉलिसी ने इस बदलाव की नींव रखी। अब नॉन-गवर्नमेंटल एंटिटीज़ (NGEs) भी इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) के साथ मिलकर काम कर सकती हैं।
इस पूरी प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए IN-SPACe को सिंगल-विंडो एजेंसी बनाया गया है, जो प्राइवेट प्लेयर्स को मंजूरी और रेगुलेशन में मदद करती है। सरकारी सहायता भी भरपूर मिल रही है। अक्टूबर 2024 में IN-SPACe के तहत ₹1,000 करोड़ का वेंचर कैपिटल फंड अप्रूव किया गया था, और फरवरी 2026 तक ₹500 करोड़ का टेक्नोलॉजी एडॉप्शन फंड लाने की भी तैयारी है।
स्टार्ट-अप्स की सफल उड़ान
इस सपोर्टिव माहौल का असर साफ दिख रहा है। Skyroot Aerospace और Agnikul Cosmos जैसी कंपनियों ने 2023 और 2024 में सफल सब-ऑर्बिटल लॉन्च किए। Pixxel Space, Azista, Hex20 और TakeMe2Space जैसे कई स्टार्ट-अप्स ने सैटेलाइट लॉन्च किए हैं, जो भारत की बढ़ती हुई स्वदेशी क्षमता को दर्शाते हैं। ISRO ने 70 से ज़्यादा टेक्नोलॉजीज़ प्राइवेट इंडस्ट्री को ट्रांसफर की हैं, जिससे ये कंपनियाँ तेज़ी से आगे बढ़ रही हैं।
फिलहाल भारत के स्पेस सेक्टर का बाज़ार मूल्य करीब $8.4 बिलियन है, जिसके अगले दशक में बढ़कर $40-45 बिलियन और 2033 तक $44 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। भारत की कोशिश है कि ग्लोबल स्पेस मार्केट में अपनी हिस्सेदारी, जो अभी करीब 2% है, उसे बढ़ाया जाए।
भविष्य के बड़े लक्ष्य
स्पेस विजन 2047 के तहत भारत 2035 तक अपना 'भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन' बनाना चाहता है और 2040 तक चांद पर मानव मिशन भेजने की तैयारी है। चंद्रयान-4, चंद्रयान-5/LUPEX, वीनस ऑर्बिटर मिशन और नेक्स्ट जनरेशन लॉन्च व्हीकल जैसे आने वाले मिशन इंड्रस्टी के सहयोग और नई टेक्नोलॉजी के विकास को और तेज़ करेंगे।
हाल ही में (2025 के अंत में) भारत ने SpaDeX मिशन के ज़रिए ऑटोमेटेड सैटेलाइट डॉकिंग का सफल प्रदर्शन किया, जिससे भारत दुनिया का चौथा देश बन गया। हालांकि, 2025 के अंत और 2026 की शुरुआत में PSLV के दो लगातार फेलियर देखे गए। अब NSIL के ज़रिए कमर्शियल लॉन्च ऑपरेशंस प्राइवेट सेक्टर को सौंपने की योजना है, ताकि ISRO अपने मुख्य और रणनीतिक मिशनों पर ध्यान केंद्रित कर सके।