SCL Mohali का दम! भारत के स्पेस मिशनों के लिए बनेंगे लोकल चिप्स

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AuthorAditya Rao|Published at:
SCL Mohali का दम! भारत के स्पेस मिशनों के लिए बनेंगे लोकल चिप्स

भारत का सेमी-कंडक्टर लैबोरेटरी (SCL) अब चंद्रयान-3 और आदित्य-L1 जैसे बड़े स्पेस मिशनों के लिए खास तरह के चिप्स की सप्लाई कर रहा है। हालांकि SCL एक सरकारी संस्थान है और इसका स्टॉक मार्केट में लिस्टेड नहीं है, लेकिन ₹4,500 करोड़ की आधुनिकरण योजना भारतीय सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा संकेत है।

स्पेस मिशनों में अहम भूमिका

अंतरिक्ष में इस्तेमाल होने वाले इलेक्ट्रॉनिक्स को अत्यधिक गर्मी, रेडिएशन और रॉकेट लॉन्च के झटकों जैसी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में आम चिप्स जल्दी खराब हो जाते हैं। SCL खास 'रेडिएशन-हार्डन्ड' कंपोनेंट्स बनाता है जो इन हालातों में भी टिके रह सकते हैं। ये चिप्स भारत के स्पेसक्राफ्ट के लिए 'नर्वस सिस्टम' की तरह काम करते हैं। उदाहरण के तौर पर, SCL ने ही चंद्रयान-3 के लैंडर के लिए कैमरा चिप और आदित्य-L1 मिशन के लिए एनालॉग-टू-डिजिटल कन्वर्टर चिप्स सप्लाई किए थे।

आधुनिकीकरण और भविष्य की क्षमता

सरकार ने SCL मोहाली को मॉडर्न बनाने के लिए ₹4,500 करोड़ का भारी निवेश करने का फैसला किया है। इसका मकसद सेमीकंडक्टर प्रोडक्शन क्षमता को बढ़ाना है ताकि देश के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को सपोर्ट मिल सके। SCL कोई कमर्शियल कंपनी नहीं है, इसलिए इसके शेयर या फाइनेंसियल रिजल्ट्स नहीं होते। लेकिन यह सरकारी निवेश भारत की सेमीकंडक्टर पॉलिसी का एक बड़ा हिस्सा है। सरकार ने यह भी साफ किया है कि SCL एक सरकारी रिसर्च फैसिलिटी बनी रहेगी, इसका प्राइवेटाइजेशन नहीं होगा।

भारतीय सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के लिए मायने

निवेशक अक्सर सेमीकंडक्टर सेक्टर को प्राइवेट कंपनियों के नजरिए से देखते हैं, लेकिन SCL की भूमिका इस इंडस्ट्री के लिए नींव की तरह है। फिलहाल, SCL मुख्य रूप से 180nm जैसे पुराने टेक्नोलॉजी नोड्स पर काम कर रहा है। यह ग्लोबल फाउंड्रीज की लेटेस्ट टेक्नोलॉजी जितना एडवांस नहीं है, लेकिन डिफेंस और एयरोस्पेस के लिए यह बहुत जरूरी और असरदार है।

SCL का आधुनिकीकरण, इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) के लिए एक 'टेस्ट बेड' का काम करेगा। जैसे-जैसे सरकार प्राइवेट कंपनियों को चिप बनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है, SCL की प्रोडक्शन बढ़ाने की कोशिशें लोकल क्षमताओं के लिए एक बेंचमार्क बनेंगी। घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग में दिलचस्पी रखने वाले निवेशकों के लिए, SCL के स्टॉक प्रदर्शन पर नजर रखने के बजाय यह देखना अहम होगा कि इसका आधुनिकीकरण कैसे लोकल हाई-ग्रेड कंपोनेंट्स की उपलब्धता बढ़ाता है और आने वाले सालों में प्राइवेट प्लेयर्स के साथ टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को कैसे प्रभावित करता है। इस इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड को लागू करना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.