ISRO EOS-05: अपने अंतिम ऑर्बिट की ओर बढ़ा सैटेलाइट, जानें भारत के लिए क्यों है यह ऐतिहासिक कदम

SCIENCE-SPACE
Whalesbook Logo
AuthorNeha Patil|Published at:
ISRO EOS-05: अपने अंतिम ऑर्बिट की ओर बढ़ा सैटेलाइट, जानें भारत के लिए क्यों है यह ऐतिहासिक कदम

ISRO का इमेजिंग सैटेलाइट EOS-05 अब **36,000 किलोमीटर** की ऊंचाई वाले अपने जियोसिंक्रोनस टारगेट की ओर सफलतापूर्वक बढ़ रहा है। यह भारत का अपनी तरह का पहला सैटेलाइट है जो पृथ्वी पर लगातार निगरानी रखने में सक्षम होगा।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का लेटेस्ट इमेजिंग सैटेलाइट EOS-05 अपने मिशन के अंतिम चरण की ओर है। 4 सितंबर, 2026 को लॉन्च के बाद, सैटेलाइट अपने ऑनबोर्ड इंजन के जरिए जटिल मैन्यूवर (Maneuvers) कर रहा है ताकि वह पृथ्वी से 36,000 किलोमीटर ऊपर अपनी तय कक्षा में स्थापित हो सके। यह उपलब्धि भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए मील का पत्थर है क्योंकि यह इस ऊंचाई पर तैनात होने वाला भारत का पहला इमेजिंग सैटेलाइट है।\n\n### तकनीक और मॉनिटरिंग में बदलाव\nपारंपरिक लो अर्थ ऑर्बिट सैटेलाइट्स के मुकाबले EOS-05 की कार्यक्षमता अलग है। यह सैटेलाइट पृथ्वी के रोटेशन के साथ मैच करेगा, जिससे किसी भी लोकेशन की 'पीरियोडिक' फोटो के बजाय लगातार रियल-टाइम मॉनिटरिंग हो सकेगी। इससे आपदा प्रबंधन, चक्रवात की ट्रैकिंग और कृषि क्षेत्र में डेटा कलेक्शन बहुत तेज और सटीक होगा।\n\n### प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी और चिंताएं\nयह मिशन न केवल तकनीक, बल्कि देश की बढ़ती स्पेस क्षमताओं का भी प्रमाण है। हालांकि, सरकार का रुख अब स्पेस सेक्टर में प्राइवेट भागीदारी बढ़ाने की ओर है, जो निवेशकों के लिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कई लिस्टेड कंपनियां इस इकोसिस्टम में पुर्जे और इंजीनियरिंग सेवाएं मुहैया कराती हैं।\n\nदूसरी ओर, इस बदलाव को लेकर इसरो के भीतर भी हलचल है। 9 कर्मचारी संगठनों ने मैन्युफैक्चरिंग के प्राइवेटाइजेशन को लेकर अपनी चिंताएं जताई हैं। स्पेस सेक्टर के भविष्य का ढांचा कैसा होगा, इस पर जारी यह बहस लॉन्ग-टर्म में स्पेस टेक्नोलॉजी फर्मों के बिजनेस एनवायरनमेंट पर गहरा असर डाल सकती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.