ISRO अब NVS-03 सैटेलाइट को श्रीहरिकोटा से GSLV रॉकेट के जरिए लॉन्च करने की तैयारी में है। इस मिशन के साथ NavIC नेटवर्क में L1 फ्रीक्वेंसी बैंड जुड़ने जा रहा है, जो इसे स्मार्टफोन और GPS सिस्टम के लिए और भी सुलभ बनाएगा।
स्मार्टफोन में NavIC की एंट्री
इस मिशन की सबसे बड़ी खासियत L1 फ्रीक्वेंसी बैंड है। अब तक ज्यादातर स्मार्टफोन और ऑटोमोटिव सिस्टम विदेशी नेविगेशन सिस्टम पर निर्भर रहे हैं, लेकिन इस तकनीकी अपग्रेड के बाद NavIC का डेटा सीधे कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल चिपसेट में इस्तेमाल हो सकेगा। यह कदम भारत की नेविगेशन आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
सप्लायर कंपनियों के लिए अवसर
NavIC के विस्तार का सीधा असर भारतीय स्पेस सप्लाई चेन से जुड़ी कंपनियों पर पड़ सकता है। इसमें Hindustan Aeronautics (HAL), Godrej Aerospace, और Larsen & Toubro जैसे बड़े नाम शामिल हैं, जो ISRO के लॉन्च व्हीकल और सैटेलाइट पेलोड के लिए महत्वपूर्ण कल-पुर्जे सप्लाई करते हैं।
GSLV पर नजरें
हालांकि GSLV, ISRO का एक भरोसेमंद रॉकेट है, लेकिन इतिहास में इसके मिश्रित प्रदर्शन ने चिंताएं भी पैदा की हैं। NVS-03 की कामयाबी इस रॉकेट की विश्वसनीयता को साबित करने के लिए बेहद जरूरी है। स्पेस इंडस्ट्री के जानकारों की नजरें इस पर टिकी हैं क्योंकि सैटेलाइट की सटीक ऑर्बिटल इंजेक्शन और onboard एटॉमिक क्लॉक्स की स्थिरता ही इस मिशन की सफलता तय करेगी।
NavIC का लक्ष्य भारतीय उपमहाद्वीप और इसके 1,500 किलोमीटर के दायरे में सटीक पोजीशन, नेविगेशन और टाइमिंग (PNT) सेवाएं प्रदान करना है। यदि यह मिशन सफल रहता है, तो ग्लोबल स्मार्टफोन ब्रांड्स के लिए NavIC को अपने स्टैंडर्ड फीचर्स में शामिल करना आसान हो जाएगा।
