WhiteOak Capital की हालिया रिसर्च के मुताबिक, अगर आप अपने पूरे इक्विटी पोर्टफोलियो में से **10%** हिस्सा डेट (Debt) में शिफ्ट करते हैं, तो पोर्टफोलियो की वोलैटिलिटी **2.6%** घट जाती है, लेकिन औसतन सालाना रिटर्न में **1.2%** की कमी आती है।
लंबे समय के लिए वेल्थ बनाने वाले निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती मार्केट के उतार-चढ़ाव को मैनेज करना होती है। WhiteOak Capital की सितंबर 2001 से सितंबर 2026 तक की एनालिसिस बताती है कि स्टॉक पोर्टफोलियो में डेट का एक छोटा सा हिस्सा जोड़ने से क्या बदलाव आते हैं।
रिस्क और रिटर्न का गणित
आंकड़े बताते हैं कि जब आप पूरी तरह इक्विटी में निवेश करते हैं, तो रिटर्न की संभावना तो ज्यादा होती है, लेकिन पोर्टफोलियो में भारी हलचल रहती है। जब आप इसमें से सिर्फ 10% पैसा डेट में डालते हैं, तो पोर्टफोलियो की वोलैटिलिटी (Volatility) 25.34% से गिरकर 22.68% पर आ जाती है।
हालांकि, यह स्टेबिलिटी मुफ्त में नहीं मिलती। डेटा के अनुसार, 100% इक्विटी पोर्टफोलियो का औसत सालाना रिटर्न 18.58% है, जो 90/10 के अनुपात में घटकर 17.39% रह जाता है। यानी, थोड़े शांत अनुभव के लिए निवेशक अपने सालाना रिटर्न में 1.2% का त्याग करते हैं।
एसेट एलोकेशन का असर
जैसे-जैसे आप डेट का हिस्सा बढ़ाते हैं, यह बदलाव और स्पष्ट होने लगता है:
- 80/20 का अनुपात: इसमें वोलैटिलिटी घटकर 20.05% हो जाती है, और औसत सालाना रिटर्न 16.21% रह जाता है।
- 70/30 का अनुपात: इसमें वोलैटिलिटी और कम होकर 17.44% रह जाती है, जबकि रिटर्न घटकर 15.03% तक आ जाता है।
इस स्थिरता का मुख्य कारण यह है कि स्टॉक और बॉन्ड अलग-अलग तरह से मार्केट पर प्रतिक्रिया देते हैं। जहां स्टॉक इकोनॉमिक सेंटिमेंट से चलते हैं, वहीं सरकारी बॉन्ड मुख्य रूप से ब्याज दरों (Interest rates) और यील्ड (Yield) के बदलावों के प्रति संवेदनशील होते हैं।
निवेश में सावधानी जरूरी
निवेशकों को यह नहीं भूलना चाहिए कि कम वोलैटिलिटी का मतलब यह नहीं है कि पोर्टफोलियो में नुकसान नहीं होगा। भारी मार्केट गिरावट के दौरान डेट वाला हिस्सा भी गिर सकता है। इस स्टडी में '10-year गवर्नमेंट बॉन्ड इंडेक्स' को डेट के तौर पर माना गया है, जबकि असल जिंदगी में निवेशक म्यूचुअल फंड्स के जरिए डेट में निवेश करते हैं, जिनमें क्रेडिट क्वालिटी और ब्याज दरों का अलग जोखिम होता है। इसलिए, किसी भी फैसले को अपनी वित्तीय स्थिति और निवेश के लक्ष्य (Time Horizon) के अनुसार ही लें।
