Specialised Investment Funds (SIFs) ने जुलाई 2026 में दमदार वापसी की है। जहां Nifty 500 में मामूली **0.52%** का उछाल आया, वहीं कुछ SIFs ने **8%** से ज़्यादा का रिटर्न दिया। इस दौरान इंडस्ट्री AUM में भी बढ़ोतरी देखी गई, जिसका मुख्य कारण हाइब्रिड लॉन्ग-शॉर्ट स्ट्रैटेजीज़ रहीं। हालांकि, एक्सपर्ट्स की मानें तो यह प्रदर्शन खास बाजार परिस्थितियों पर निर्भर था और निवेशकों को मंथली रिटर्न के बजाय लॉन्ग-टर्म डाउनसाइड प्रोटेक्शन पर ध्यान देना चाहिए।
स्पेशल इन्वेस्टमेंट फंड्स का जलवा
जुलाई 2026 में भारत के स्पेशल इन्वेस्टमेंट फंड्स (SIFs) ने गज़ब का प्रदर्शन किया है। ज़्यादातर फंड्स ने बेंचमार्क Nifty 500 इंडेक्स से कहीं ज़्यादा रिटर्न दिया है। जहां Nifty 500 ने महीने में सिर्फ 0.52% की बढ़त दर्ज की, वहीं SIFs, जैसे qSIF AAA, ने 8.26% तक का रिटर्न कमाया। SIFPrime के अनुसार, ट्रैक की गईं 27 स्ट्रैटेजीज़ में से 26 ने पॉजिटिव नतीजे दिए, जिससे कैटेगरी का एवरेज मंथली गेन करीब 2.40% रहा।
प्रदर्शन के पीछे के कारण?
इन फंड्स का शानदार प्रदर्शन एक समान नहीं था। एनालिस्ट्स का कहना है कि जुलाई में कुछ खास मार्केट डायनामिक्स ने SIF स्ट्रैटेजीज़ को फायदा पहुंचाया। सबसे बड़ा कारण था स्मॉल-कैप स्टॉक्स में आई तेजी, जिनका वेटेज अक्सर Nifty 500 (जो लार्ज-कैप पर ज़्यादा फोकस करता है) की तुलना में SIF पोर्टफोलियो में अलग होता है। इसके अलावा, कई SIFs, खासकर हाइब्रिड लॉन्ग-शॉर्ट कैटेगरी के फंड्स ने कवर्ड कॉल्स और प्रोटेक्टिव ऑप्शन्स जैसी हेजिंग तकनीकों का इस्तेमाल किया। जुलाई 2026 के बाजार हालातों ने इन एक्टिव एसेट एलोकेशन स्ट्रैटेजीज़ को वोलैटिलिटी का फायदा उठाने में मदद की, जिससे टॉप परफॉर्मिंग फंड्स में करीब 15% से 25% तक का गेन आया।
इंडस्ट्री ग्रोथ और रेगुलेटरी माहौल
SIFs का पूरा इकोसिस्टम तेज़ी से बढ़ रहा है। टोटल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) में महीने-दर-महीने करीब 30% की बढ़ोतरी हुई है, जो ₹23,177 करोड़ से ₹23,345 करोड़ के बीच पहुंच गई है। फिलहाल, हाइब्रिड लॉन्ग-शॉर्ट फंड्स इस स्पेस पर हावी हैं, जो टोटल इंडस्ट्री एसेट्स का लगभग 66% से 71% हिस्सा बनाते हैं। इस ग्रोथ के साथ ही, SBI और Aditya Birla Sun Life AMC जैसी बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनियों ने SEBI-रेगुलेटेड SIFs लॉन्च किए हैं, जो इन स्पेशलाइज्ड प्रोडक्ट्स में बढ़ती संस्थागत और रिटेल दिलचस्पी को दर्शाते हैं।
स्थिरता और जोखिम पर एक नज़र
जुलाई के पॉजिटिव आंकड़ों के बावजूद, फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं। SIFPrime के फाउंडर, किरण दत्ता ने जोर देकर कहा कि जुलाई में देखे गए सेक्टर रैलीज और हेजिंग एग्जीक्यूशन का खास कॉम्बिनेशन लगातार दोहराना मुश्किल है। कॉम्प्लेक्स डेरिवेटिव्स और एक्टिव स्टॉक पिकिंग पर निर्भरता में एग्जीक्यूशन रिस्क भी जुड़ा है, और पिछला प्रदर्शन भविष्य की गारंटी नहीं है।
इंडस्ट्री एनालिस्ट्स अक्सर सलाह देते हैं कि SIFs का मूल्यांकन मार्केट में गिरावट के दौरान कैपिटल बचाने की उनकी क्षमता के आधार पर किया जाना चाहिए, न कि शॉर्ट-टर्म मार्केट स्पाइक्स को चेज़ करने की क्षमता पर। ऐतिहासिक डेटा भी इसी पर जोर देता है। मार्च 2026 की मार्केट वोलैटिलिटी के दौरान, SIFs में करीब 6% की गिरावट आई थी, जबकि Nifty 500 11.3% लुढ़क गया था। निवेशकों के लिए, मंथली उतार-चढ़ाव के बजाय मैक्सिमम ड्रॉडाउन, कैल्मार रेशियो और बेंचमार्क के मुकाबले लॉन्ग-टर्म कंसिस्टेंसी जैसे मेट्रिक्स पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है। अगली बड़ी अपडेट यह होगी कि अगर मार्केट वोलैटिलिटी बनी रहती है या स्मॉल-कैप रैली धीमी पड़ती है तो ये फंड्स कैसा प्रदर्शन करते हैं, जिससे उनकी मौजूदा हेजिंग स्ट्रैटेजीज़ की प्रभावशीलता परखी जाएगी।
