Small-cap स्टॉक्स में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। कंपनी के मुनाफे में जबरदस्त बढ़ोतरी के चलते करीब **47%** स्टॉक्स अब अपने **10** साल के औसत वैल्युएशन से नीचे ट्रेड कर रहे हैं।
भारतीय शेयर बाजार में स्मॉल-कैप सेगमेंट के लिए तस्वीर बदल रही है। पहले जो स्टॉक्स महंगे लग रहे थे, अब वहां एक वैल्यूएशन रीसेट देखने को मिल रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण हालिया अर्निंग्स सीजन रहा है, जिसमें स्मॉल-कैप कंपनियों ने साल-दर-साल आधार पर 35% का मुनाफा दर्ज किया है। दिलचस्प बात यह है कि यह ग्रोथ लार्ज-कैप कंपनियों की 20% की ग्रोथ से कहीं ज्यादा है।
क्यों बदल रहा है मार्केट का मूड?
स्मॉल-कैप स्पेस में यह उछाल काफी व्यापक है। करीब 16 सेक्टरों ने 10% से ज्यादा प्रॉफिट ग्रोथ दिखाई है। अब निवेशक सिर्फ P/E रेशियो पर निर्भर रहने के बजाय PEG (Price/Earnings-to-Growth) रेशियो पर ध्यान दे रहे हैं। भविष्य की कमाई की क्षमता को देखते हुए, अब इन स्टॉक्स का वैल्युएशन पहले के मुकाबले काफी संतुलित नजर आ रहा है।
आगे की राह और रिस्क फैक्टर्स
मार्केट एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि साल 2025 से 2028 के बीच स्मॉल-कैप कंपनियों की प्रति शेयर कमाई (EPS) 26% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट से बढ़ सकती है। डिफेंस, कैपिटल गुड्स और प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर, जहां ऑर्डर बुक मजबूत है, वहां यह तेजी ज्यादा साफ दिख रही है।
हालांकि, एक निवेशक के तौर पर आपको सतर्क रहने की जरूरत है। बाजार ने पहले ही आने वाले सालों के लिए आक्रामक ग्रोथ टारगेट सेट कर रखे हैं। अगर कंपनियां अपनी अर्निंग्स उम्मीदों पर खरी नहीं उतरती हैं, तो यह वैल्युएशन कुशन कम हो सकता है। इसलिए, अब इंडेक्स के पीछे भागने के बजाय उन कंपनियों पर ध्यान केंद्रित करना जरूरी है जो अपनी प्रॉफिट की रफ्तार को लगातार बनाए रखने का दम रखती हैं।
