साल **2004** से **2026** तक का डेटा यह बताता है कि Nifty Smallcap 100 इंडेक्स अपने पीक से नीचे काफी समय बिताता है। स्मॉलकैप में तेजी की संभावना तो है, लेकिन भारी गिरावट और लंबे समय तक रिकवरी न होना एक बड़ी सच्चाई है।
अस्थिरता (Volatility) ही स्मॉलकैप की पहचान
स्मॉलकैप स्टॉक्स में अक्सर लोग मोटा मुनाफा देखकर पैसा लगाते हैं, लेकिन डेटा कुछ और ही कहानी बयां करता है। जनवरी 2004 से सितंबर 2026 के आंकड़ों पर नजर डालें तो, Nifty Smallcap 100 इंडेक्स 63% समय अपने पिछले हाई (Peak) से कम से कम 10% नीचे रहा है। वहीं, बड़े शेयरों का इंडेक्स Sensex यह गिरावट केवल 33% समय ही देखता है, जो साबित करता है कि स्मॉलकैप में उतार-चढ़ाव कहीं ज्यादा है।
रिकवरी में सालों का इंतजार
स्मॉलकैप की सबसे बड़ी चुनौती है—गिरावट के बाद वापसी का लंबा समय। उदाहरण के लिए, 2008 के फाइनेंशियल क्राइसिस के बाद इंडेक्स को अपने पुराने हाई लेवल पर वापस आने में 7 साल से ज्यादा का समय लगा। नया हाई जुलाई 2016 में जाकर बना। अगर किसी रिटेल निवेशक को उस बीच पैसों की जरूरत पड़ गई, तो उसे भारी नुकसान उठाना पड़ा होगा।
हर साल एक नया रिस्क
डेटा के मुताबिक, 22 में से 21 साल ऐसे रहे हैं जब इंडेक्स में साल के दौरान कम से कम 10% की गिरावट आई है। हालांकि, करीब दो-तिहाई मामलों में साल के अंत तक इंडेक्स पॉजिटिव रिटर्न देने में कामयाब रहा है। इससे एक बात साफ है—स्मॉलकैप में निवेश करने का मतलब है कि आपको बहुत लंबे नजरिए (Multi-year horizon) के साथ बने रहना होगा। यदि आपको अगले 1-2 साल में पैसों की जरूरत है, तो स्मॉलकैप में निवेश करना आपकी फाइनेंशियल प्लानिंग को बुरी तरह बिगाड़ सकता है।
