ग्लोबल मार्केट से मिले खराब संकेतों और वेस्ट एशिया में जारी तनाव के बीच क्रूड ऑयल के दाम **$108** प्रति बैरल पहुंच गए हैं, जिससे भारतीय बाजारों में बड़ी गिरावट देखी जा रही है। Nifty 50 अब **23,300** के क्रिटिकल सपोर्ट लेवल पर टिका हुआ है।
तेल की कीमतों का सीधा असर
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए भारी मात्रा में आयात पर निर्भर है, इसलिए क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल सीधे तौर पर कंपनियों के मार्जिन पर चोट करता है। महंगे तेल का मतलब है ज्यादा इन्फ्लेशन और चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) का बढ़ना। यही कारण है कि मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और कंज्यूमर गुड्स जैसे सेक्टर में बिकवाली हावी है।
टेक्निकल चार्ट क्या कहता है?
Nifty 50 इस समय एक बेहद नाजुक मोड़ पर है। एनालिस्ट्स की नजरें 23,300 के सपोर्ट जोन पर टिकी हैं। अगर इंडेक्स इसे नहीं बचा पाया, तो बाजार में 23,000 के स्तर तक गिरावट के दरवाजे खुल सकते हैं। वहीं, ऊपर की तरफ 23,550 से 23,600 के बीच रेजिस्टेंस है। फिलहाल, इंडेक्स अपने मुख्य मूविंग एवरेज के नीचे ट्रेड कर रहा है, जो बाजार में मंदी (Bearish Trend) का संकेत है।
Bank Nifty और निवेशकों के लिए संकेत
सिर्फ निफ्टी ही नहीं, Bank Nifty भी काफी दबाव में है। बैंकिंग स्टॉक्स ब्याज दरों और महंगाई के आंकड़ों के प्रति बहुत संवेदनशील होते हैं, इसलिए इस सेक्टर में रिकवरी फिलहाल मुश्किल दिख रही है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर एडवांस-डिक्लाइन रेशियो कमजोर है, जिसका मतलब है कि गिरावट वाले शेयरों की संख्या बढ़ने वाले शेयरों से काफी ज्यादा है।
फिलहाल मार्केट एक्सपर्ट्स निवेशकों को 'डिफेंसिव' मोड में रहने की सलाह दे रहे हैं। जब तक कच्चे तेल में स्थिरता नहीं आती और वैश्विक बाजारों से कोई सकारात्मक खबर नहीं मिलती, तब तक एग्रेसिव पोजीशन लेने से बचने की जरूरत है।
