PL Capital की इंडिया स्ट्रेटेजी रिपोर्ट ने फाइनेंशियल ईयर 2026 (मार्च 2026 में समाप्त होने वाले साल) के लिए Nifty की अर्निंग ग्रोथ का अनुमान घटाकर 4% कर दिया है। यह फाइनेंशियल ईयर 2025 के 6% के अनुमान से एक बड़ी गिरावट है, जिसका मुख्य कारण ग्लोबल इकोनॉमी का अनिश्चित माहौल है।
इस कटौती के पीछे कई बड़े कारण हैं। सबसे अहम हैं पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल। एक बड़े एनर्जी इम्पोर्टर देश के नाते, भारत का सालाना तेल आयात बिल 70 अरब डॉलर से पार जा सकता है। इसका सीधा असर महंगाई पर पड़ेगा, जो 5% के स्तर को पार कर सकती है।
महंगाई बढ़ने की चिंता यहीं खत्म नहीं होती। लगातार बनी हुई ग्लोबल सप्लाई चेन की दिक्कतें और अल नीनो (El Nino) का मॉनसून पर पड़ने वाला संभावित प्रतिकूल असर भी इकोनॉमी पर भारी पड़ सकता है। इन संयुक्त कारणों से भारत की GDP ग्रोथ 6.5% से घटकर 6% के करीब आ सकती है।
फिलहाल, Nifty अपने फॉरवर्ड अर्निंग्स पर 17 गुना (times) पर ट्रेड कर रहा है, जो इसके पिछले 15 साल के औसत 19.4 गुना से 12.4% कम है। PL Capital का बेस केस अनुमान है कि FY28 तक वैल्यूएशन 17.5 गुना रहेगा, जो औसत से 10% कम होगा। इसी आधार पर FY28 के लिए प्रति शेयर आय (EPS) 1,551 रुपये और टारगेट प्राइस 27,080 रुपये का अनुमान लगाया गया है।
PL Capital के को-हेड ऑफ इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज, अमनीश अग्रवाल (Amnish Aggarwal) ने कहा, 'भारत में लंबी अवधि की ग्रोथ की अच्छी क्षमता के बावजूद, मौजूदा महंगाई, ब्याज दरें और ग्लोबल डिमांड की दिक्कतें इकोनॉमी की रफ्तार को धीमा कर रही हैं।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि 'अभी शेयर बाजार की कीमतें इन जोखिमों को काफी हद तक दर्शाती हैं, लेकिन अगर ग्लोबल अनिश्चितता बनी रहती है, तो हमें अर्निंग्स के अनुमानों में और भी कटौती करनी पड़ सकती है।'
