सितंबर महीने की शुरुआत में Nifty और Bank Nifty कंसोलिडेशन फेज से गुजर रहे हैं। निवेशकों की नजर **24,000** और **57,000** के अहम सपोर्ट जोन पर है, क्योंकि ग्लोबल मार्केट की अनिश्चितता और बढ़ती वोलेटिलिटी भारतीय बाजारों पर दबाव बना रही है।
नए हफ्ते की शुरुआत के साथ Nifty 50 और Bank Nifty दोनों ही इंडेक्स एक सीमित दायरे (range-bound) में कारोबार कर रहे हैं। मार्केट फिलहाल किसी भी तरफ साफ ट्रेंड दिखाने के बजाय कंसोलिडेट कर रहा है, जिससे निवेशकों को टेक्निकल लेवल्स पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है।
Nifty के सपोर्ट और रेजिस्टेंस जोन
फिलहाल Nifty 50 इंडेक्स 24,000 से 24,100 के क्रिटिकल सपोर्ट जोन के पास टिका हुआ है। यह लेवल इंडेक्स के लिए एक मजबूत आधार की तरह काम कर रहा है। यदि बाजार इस रेंज को होल्ड कर लेता है, तो यह 24,300 से 24,400 के रेजिस्टेंस की ओर रुख कर सकता है। हालांकि, अगर Nifty 24,000 के नीचे फिसलता है, तो सेलिंग प्रेशर बढ़ सकता है और इंडेक्स 23,800 के निचले स्तर तक गिर सकता है।
Bank Nifty की चाल
Bank Nifty का हाल भी कुछ ऐसा ही है, जहां 57,000 का स्तर सबसे महत्वपूर्ण सपोर्ट के रूप में उभर कर आया है। इंडेक्स पिछले कुछ सत्रों से इस रेंज में फंसा हुआ है। अगर बैंक इंडेक्स को मजबूती दिखानी है, तो उसे ऊपरी रुकावटों को पार करना होगा। जब तक कोई स्पष्ट ब्रेकआउट नहीं मिलता, तब तक ट्रेडर्स को ओवर-लेवरेजिंग से बचने की सलाह दी जा रही है।
मार्केट की दिशा तय करने वाले कारक
मार्केट केवल चार्ट्स पर ही नहीं, बल्कि ग्लोबल मैक्रो-इकोनॉमिक खबरों पर भी रिएक्ट कर रहा है। निवेशक खास तौर पर अमेरिकी जॉब डेटा और Federal Reserve की नीतियों पर नजर बनाए हुए हैं। इसके अलावा, ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी बाजार के सेंटिमेंट को प्रभावित कर रहे हैं।
India VIX की बढ़ती वोलेटिलिटी अचानक बड़े स्विंग्स पैदा कर सकती है, इसलिए मार्केट एक्सपर्ट्स सलाह दे रहे हैं कि जब तक इंडेक्स अपनी वर्तमान रेंज से बाहर नहीं निकलते, तब तक सतर्क रहकर शॉर्ट-टर्म रणनीति अपनाना ही बेहतर होगा।
