Nifty 50 इन दिनों एक सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है। इंडेक्स फिलहाल **24,176** के पास है और **24,000** का लेवल एक मजबूत साइकोलॉजिकल सपोर्ट के रूप में काम कर रहा है। IT स्टॉक्स में रिकवरी के बावजूद ग्लोबल टेंशन के चलते निवेशक सतर्क हैं।
फिलहाल Nifty 50 में कंसोलिडेशन का दौर चल रहा है, जहां खरीदार और बिकवाल के बीच खींचतान जारी है। 28 अगस्त 2026 तक इंडेक्स 24,176 के स्तर पर बंद हुआ और पिछले कुछ सत्रों से यह एक तंग दायरे में ही फंसा हुआ है।
24,000 के लेवल का महत्व
इस हफ्ते निवेशकों के लिए 24,000 का मार्क सबसे महत्वपूर्ण है। यह एक साइकोलॉजिकल सपोर्ट है। अगर इंडेक्स इसके नीचे फिसलता है और क्लोजिंग देता है, तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है और बाजार 23,700 से 23,800 के रेंज तक गिर सकता है। वहीं, ऊपर की तरफ इंडेक्स के लिए 24,250 से 24,350 के बीच तुरंत रेजिस्टेंस दिख रहा है।
मार्केट ड्राइवर्स और सेक्टर परफॉर्मेंस
बाजार में फिलहाल कोई साफ ट्रेंड नहीं है। IT सेक्टर की रिकवरी ने इंडेक्स को सहारा दिया है, लेकिन बाकी सेक्टर में कमजोरी दिख रही है। हालांकि Nifty Midcap 100 और Nifty Smallcap 100 जैसे ब्रॉडर इंडेक्स अधिक मजबूती दिखा रहे हैं, लेकिन निवेशकों को ध्यान रखना चाहिए कि अनिश्चितता के दौर में इनमें वोलेटिलिटी (Volatility) अधिक रह सकती है।
ग्लोबल रिस्क पर रखें नजर
भारतीय बाजार का मिजाज फिलहाल ग्लोबल फैक्टर्स से तय हो रहा है। क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव चिंता का विषय है, क्योंकि इससे कंपनियों के मार्जिन और इन्फ्लेशन पर असर पड़ता है। इसके अलावा, अमेरिका और ईरान के बीच जियोपॉलिटिकल टेंशन और ग्लोबल मॉनेटरी पॉलिसी को लेकर अनिश्चितता ने बाजार में डर का माहौल बना रखा है। जब तक इंडेक्स 24,350 के ऊपर नहीं निकलता या 24,000 के नीचे नहीं टूटता, तब तक जोखिम प्रबंधन (Risk Management) पर फोकस करना ही समझदारी है।
