सितंबर 2026 तिमाही के नतीजों में Nifty 50 कंपनियां **27%** की प्रॉफिट ग्रोथ दिखा सकती हैं। बैंकिंग, टेलीकॉम और मेटल सेक्टर की दमदार वापसी के बावजूद, बढ़ती इनपुट कॉस्ट और FII की बिकवाली निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
भारतीय कॉरपोरेट जगत फाइनेंशियल ईयर 2027 की दूसरी तिमाही के लिए एक बड़े अर्निंग्स बूस्ट की तैयारी कर रहा है। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के अनुमानों के मुताबिक, Nifty 50 कंपनियों का कुल मुनाफा पिछले साल के मुकाबले 27% तक बढ़ सकता है। यह ग्रोथ रेट पिछले 17 तिमाहियों का उच्चतम स्तर है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था में मजबूत रिकवरी के संकेत दे रहा है।
कौन से सेक्टर रहे ग्रोथ के इंजन?
यह तेजी सभी सेक्टरों में एक समान नहीं है। बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर, जिसमें प्राइवेट और पब्लिक सेक्टर बैंक के साथ NBFCs शामिल हैं, 24% से 27% की ग्रोथ के साथ मुख्य आधार बने हुए हैं। वहीं, मेटल सेक्टर में 44% और टेलीकॉम सेक्टर में तो 71% तक मुनाफे में उछाल देखने को मिल सकता है, जिसमें Bharti Airtel का बड़ा योगदान है।
मार्जिन का दबाव और चुनौतियां
मुनाफे के हेडलाइन आंकड़े भले ही आकर्षक दिख रहे हों, लेकिन कंपनियां मार्जिन को लेकर संघर्ष कर रही हैं। नॉन-फाइनेंशियल कंपनियों के लिए EBITDA मार्जिन में 50 बेसिस पॉइंट्स की गिरावट आने का अनुमान है। बढ़ती इनपुट कॉस्ट को ग्राहकों पर डालना कंपनियों के लिए मुश्किल हो रहा है। इसके साथ ही, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली और वैश्विक अनिश्चितता ने बाजार के सेंटीमेंट को थोड़ा सुस्त रखा है। आने वाली तिमाहियों में कंपनियों के पास 'प्राइसिंग पावर' कितनी है, यह देखना निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण होगा।
