लगातार 8 हफ्तों की भारी गिरावट के बाद Nifty 50 ने आखिरकार राहत की सांस ली है। इंडेक्स **0.44%** चढ़कर **22,520.45** पर बंद हुआ है। हालांकि, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और RBI की बढ़ती दरों के बीच बाजार का रुख अभी भी सतर्क है।
बाजार की चाल और टेक्निकल संकेत
Nifty 50 ने पिछले 8 हफ्तों की लगातार गिरावट के सिलसिले को तोड़ते हुए इस हफ्ते 0.44% की रिकवरी दर्ज की है। हफ्ते के दौरान इंडेक्स 22,179.90 के नए 52-वीक लो तक फिसल गया था, लेकिन वहां से मिली खरीदारी ने इसे 22,520.45 तक खींच लिया।
टेक्निकल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, वीकली चार्ट पर Bullish Harami और Doji जैसे पैटर्न बन रहे हैं, जो इस बात का संकेत हैं कि बिकवाली का जोर कम हो रहा है। फिलहाल 22,180 से 22,200 का लेवल एक मजबूत सपोर्ट के तौर पर काम कर रहा है। ऊपर की तरफ 22,600 से 22,800 का रेजिस्टेंस जोन बना हुआ है, जिसे पार करना इंडेक्स की मजबूती के लिए जरूरी है।
बैंकिंग सेक्टर में जान और चुनौतियां
इस हफ्ते IT, बैंकिंग और FMCG सेक्टर ने बाजार को संभालने में बड़ी भूमिका निभाई। खास तौर पर Bank Nifty ने 1.48% की तेजी के साथ बाजार में दम दिखाया। कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आई मामूली नरमी ने भी निवेशकों को राहत दी।
हालांकि, चुनौतियां अभी बरकरार हैं। FIIs (Foreign Institutional Investors) की लगातार बिकवाली और RBI द्वारा रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी कर उसे 5.50% करने का दबाव बना हुआ है। हाई रेपो रेट से कंपनियों की कर्ज लेने की लागत बढ़ती है, जिससे प्रॉफिटेबिलिटी पर असर पड़ता है।
ग्लोबल मार्केट का दबाव
घरेलू बाजार के अलावा, अमेरिका में 10-year US Treasury bond yield का 5.27% के ऊंचे स्तर पर बने रहना चिंता का विषय है। जब अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ती है, तो ग्लोबल निवेशक इमर्जिंग मार्केट्स जैसे भारत से पैसा निकाल कर सुरक्षित एसेट्स की तरफ भागने लगते हैं। फिलहाल Nifty अपने लॉन्ग-टर्म मूविंग एवरेज के नीचे ट्रेड कर रहा है, इसलिए एक्सपर्ट्स इसे ट्रेंड रिवर्सल के बजाय एक अस्थायी राहत मान रहे हैं।
