NIT Rourkela का कमाल: कोयले के कचरे से बनाई सड़क, मिली पेटेंट की मंजूरी

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AuthorNeha Patil|Published at:
NIT Rourkela का कमाल: कोयले के कचरे से बनाई सड़क, मिली पेटेंट की मंजूरी

NIT Rourkela के शोधकर्ताओं ने कोयले की खदानों से निकले कचरे और फ्लाई ऐश का इस्तेमाल करके एक नई, मजबूत सड़क निर्माण सामग्री विकसित की है। इस इनोवेशन को पेटेंट मिल गया है और इसका मकसद इंफ्रास्ट्रक्चर की लागत कम करना और खनन वाले इलाकों में सड़कों की टिकाऊपन को बढ़ाना है।

कोयले का कचरा अब बनेगा मजबूत सड़क

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT), Rourkela के वैज्ञानिकों ने सड़क बनाने के लिए एक बिल्कुल नए कंपोजिट मटेरियल (composite material) को पेटेंट कराया है। इस पेटेंट, जिसका नंबर 597749 है, के तहत कोयले की खदानों से निकलने वाले बेकार हिस्से (coal partings) और फ्लाई ऐश (fly ash) का इस्तेमाल करके एक हाई-स्ट्रेंथ (high-strength) सड़क सामग्री तैयार की गई है।

कैसे काम करती है यह तकनीक?

यह तकनीक कोयले के खनन के दौरान आमतौर पर फेंके जाने वाले मटेरियल के मैकेनिकल गुणों (mechanical properties) पर आधारित है। कोयले के बेकार हिस्से, जिनमें सिलिका (silica) और एलुमिना (alumina) होता है, को फ्लाई ऐश और एक खास तरह के बाइंडर (binder) के साथ मिलाकर ऐसा मिश्रण तैयार किया गया है जो भारी वाहनों का वजन आसानी से सह सके। इस डेवलपमेंट से दो बड़ी समस्याओं का समाधान होता है: एक, इंडस्ट्रियल वेस्ट (industrial waste) के निपटान की पर्यावरणीय चुनौती और दूसरा, कोयला उत्पादक क्षेत्रों में टिकाऊ सड़कों की जरूरत।

इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के लिए क्या है खास?

इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन (construction) सेक्टर के लिए, यह डेवलपमेंट मैटेरियल सोर्सिंग (material sourcing) में स्थिरता (sustainability) की ओर एक बड़े बदलाव का संकेत देता है। मौजूदा समय में, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में पत्थर और बजरी जैसे नेचुरल एग्रीगेट्स (natural aggregates) पर बहुत निर्भरता है। अगर यह कंपोजिट बड़े पैमाने पर सफल साबित होता है, तो यह सड़क परियोजनाओं में लगी कंपनियों के लिए एक किफायती (cost-effective) और पर्यावरण के अनुकूल (environmentally friendly) विकल्प पेश कर सकता है, खासकर उन औद्योगिक इलाकों में जहां कोयले का कचरा आसानी से उपलब्ध है।

आगे की राह और चुनौतियां

हालांकि, लैब में पेटेंट की गई इस तकनीक को कमर्शियल इंफ्रास्ट्रक्चर (commercial infrastructure) में लाने में काफी मुश्किलें हैं। अब पूरा फोकस पायलट-स्केल फील्ड ट्रायल्स (pilot-scale field trials) पर है। ये ट्रायल्स यह तय करने के लिए बहुत ज़रूरी हैं कि भारी ट्रैफिक के कारण होने वाले लगातार घिसाव को यह मटेरियल असल में कितने समय तक झेल पाता है।

शारीरिक टिकाऊपन (physical durability) के अलावा, मटेरियल को रेगुलेटरी (regulatory) और पर्यावरणीय सुरक्षा मानकों (environmental safety standards) को भी पूरा करना होगा। पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर में इंडस्ट्रियल वेस्ट के इस्तेमाल के लिए यह सुनिश्चित करने के वास्ते कड़ी टेस्टिंग की ज़रूरत है कि इससे लंबे समय में कोई पर्यावरणीय या स्वास्थ्य जोखिम न हो। कमर्शियल तौर पर इसे अपनाने की संभावना इन ट्रायल्स के नतीजों और पारंपरिक सड़क-निर्माण सामग्री के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए प्रोडक्शन को बढ़ाने की आर्थिक व्यवहार्यता (economic feasibility) पर बहुत हद तक निर्भर करेगी। इंडस्ट्री के लोग इन आने वाले फील्ड ट्रायल्स पर नज़र रखेंगे कि क्या यह तकनीक अकादमिक रिसर्च (academic research) से निकलकर बड़े पैमाने पर इस्तेमाल के लायक बन पाती है या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.