Morgan Stanley के मुताबिक AI से जुड़े कैपिटल खर्च (Capex) की रफ्तार धीमी होने वाली है। साल 2026 में **93%** रहने वाली ग्रोथ 2028 तक घटकर **14%** पर आ सकती है, क्योंकि अब कंपनियां हार्डवेयर के बजाय सॉफ्टवेयर और प्रोडक्टिविटी पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं।
Morgan Stanley ने ग्लोबल AI इन्वेस्टमेंट साइकिल में एक बड़े बदलाव की भविष्यवाणी की है। रिसर्च के अनुसार, हाइपरस्केलर्स (बड़े क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर्स) के कैपिटल एक्सपेंडिचर में जो तेजी देखी जा रही थी, वह अब धीरे-धीरे कम होने वाली है। यह बदलाव दर्शाता है कि कंपनियां अब भारी मात्रा में GPU जैसे कंप्यूटिंग हार्डवेयर जमा करने के बजाय, AI-आधारित सॉफ्टवेयर और एंटरप्राइज एप्लीकेशन्स को इंटीग्रेट करने पर पैसा खर्च करेंगी।
हार्डवेयर की डिमांड में नरमी
AI इंडस्ट्री अब एक मैच्योर फेज में प्रवेश कर रही है। शुरुआती दौर में डेटा सेंटर ऑपरेटरों का ध्यान बुनियादी ढांचे को खड़ा करने पर था, जिसके लिए उन्होंने भारी हार्डवेयर खरीदारी की। अब जैसे-जैसे क्षमताएं तैयार हो रही हैं, कंपनियां इन निवेशों से मुनाफा कमाने (Monetize) के लिए सॉफ्टवेयर पर ध्यान दे रही हैं। हालांकि हाई-एंड सेमीकंडक्टर की मांग बनी रहेगी, लेकिन 2026 जैसी जबरदस्त ग्रोथ दर कम होने की संभावना है।
पावर और रेगुलेटरी की अड़चनें
निवेश की रफ्तार कम होने के बावजूद, इंडस्ट्री के सामने कुछ बड़ी चुनौतियां हैं। सबसे बड़ी समस्या बिजली की कमी है, जिसके चलते 2026 से 2028 के बीच 57 गीगावाट का शॉर्टफॉल होने का अनुमान है। इसके अलावा, रेगुलेटरी और पर्यावरणीय कारणों से अमेरिका में लगभग USD 286 बिलियन के डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स अटके हुए हैं। ये बाधाएं डेटा सेंटर की कैपेसिटी और डिमांड के बीच अंतर को लंबे समय तक बनाए रख सकती हैं।
प्रोडक्टिविटी और मार्जिन में सुधार
AI के सॉफ्टवेयर केंद्रित होने से अब निवेशकों का ध्यान ROI और कार्यक्षमता पर है। जिन कंपनियों ने AI अपनाया है, उन्होंने अपनी प्रोडक्टिविटी में औसतन 9.6% का नेट इजाफा देखा है। Morgan Stanley का मानना है कि इससे 2027 तक नेट मार्जिन में लगभग 100 बेसिस पॉइंट्स का विस्तार देखने को मिल सकता है। साइबर सुरक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर-संबंधी सॉफ्टवेयर सेक्टर में भविष्य में बड़ी वैल्यू क्रिएट हो सकती है।
भारतीय IT कंपनियों के लिए यह बदलाव नए अवसर लेकर आया है। जैसे-जैसे मांग हार्डवेयर से हटकर सॉफ्टवेयर और एप्लीकेशन डेवलपमेंट की ओर बढ़ेगी, भारतीय सर्विस प्रोवाइडर्स को कंसल्टिंग और इंटीग्रेशन के नए प्रोजेक्ट्स मिल सकते हैं। निवेशकों को अब डेटा सेंटर की बिजली क्षमता और टेक सेक्टर की प्रोडक्टिविटी मैट्रिक्स पर नजर रखने की जरूरत है।
