Jefferies की नई रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में केवल **3%** लोग ही इक्विटी में निवेश करते हैं। यह आंकड़ा अमेरिका के **60%** और चीन के **18%** से काफी कम है, जो भविष्य में लंबी ग्रोथ की अपार संभावनाओं की ओर इशारा करता है।
ग्रोथ की बड़ी संभावना
जेफरीज (Jefferies) का मानना है कि भारतीय बाजार में भागीदारी का यह कम स्तर सुस्ती नहीं, बल्कि एक बड़े स्ट्रक्चरल ग्रोथ रनवे (Structural Growth Runway) की शुरुआत है। जैसे-जैसे देश की अर्थव्यवस्था बढ़ेगी और पर्सनल इनकम में इजाफा होगा, वैसे-वैसे घरेलू पूंजी (Domestic Capital) का शेयर बाजार में आना तय है।
बाजार का दबाव और घरेलू मजबूती
भारतीय सेकेंडरी मार्केट ने साल 2026 की पहली तीन तिमाहियों में काफी दबाव देखा है। Nifty 50 इंडेक्स में 14% की गिरावट आई है, जिसका मुख्य कारण फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPI) द्वारा निकाला गया ₹3.08 लाख करोड़ का भारी-भरकम फंड है। हालांकि, इस बिकवाली के बावजूद प्राइमरी मार्केट ने गजब की मजबूती दिखाई है। कंपनियों ने इस दौरान IPOs के जरिए $12.5 बिलियन जुटाए हैं, जो यह साबित करता है कि घरेलू स्तर पर नई इक्विटी की डिमांड अभी भी बरकरार है।
नया निवेश आधार (Domestic Base)
आज का युवा, जो डिजिटल रूप से जागरूक है, बाजार की तस्वीर बदल रहा है। हालांकि अभी भी घरेलू बचत का बड़ा हिस्सा ट्रेडिशनल विकल्पों में है, लेकिन मार्केट-लिंक्ड एसेट्स की ओर झुकाव तेजी से बढ़ा है। यह घरेलू बेस अब बाजार के लिए एक बफर की तरह काम कर रहा है, जो विदेशी पूंजी के बाहर जाने के बावजूद बाजार को स्थिरता दे रहा है।
जानकारों के मुताबिक, आने वाले समय में बाजार की गहराई इस बात पर निर्भर करेगी कि भारतीय कंपनियां कैसा अर्निंग्स परफॉर्मेंस (Earnings Performance) दिखाती हैं। अगर कॉर्पोरेट प्रॉफिट में निरंतरता बनी रहती है, तो यह वैल्यूएशन को सपोर्ट करने के लिए एक मजबूत आधार बनेगा।
