JPMorgan ने Nifty 50 इंडेक्स के लिए अपने साल के अंत के बेस टारगेट को बड़ा घटाकर 27,000 कर दिया है, जो पहले 30,000 था। फर्म के सबसे खराब अनुमान (Bear Case) के मुताबिक, इंडेक्स 20,500 तक भी गिर सकता है। यह बड़ा फेरबदल इसलिए किया गया है क्योंकि हाल ही में इंडेक्स अपने जनवरी के उच्चतम स्तर से 9.7% लुढ़क चुका है।
विश्लेषकों का मानना है कि बढ़ते आर्थिक दबाव और लागतों में वृद्धि के कारण भारतीय कंपनियों के मार्च तिमाही के नतीजों (Earnings) का अनुमान कम करना होगा। JPMorgan के विश्लेषकों ने कंज्यूमर स्टेपल्स सेक्टर को 'न्यूट्रल' कर दिया है। इस तिमाही में Nifty की कंपनियों के मुनाफे में सालाना आधार पर करीब 4% की मामूली बढ़ोतरी का अनुमान है, जबकि JPMorgan द्वारा कवर की जाने वाली कंपनियों में यह 10% रह सकती है। Nifty के ऑपरेटिंग मार्जिन में 62 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी और JPMorgan के कवरेज यूनिवर्स में 56 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी का अनुमान है।
बाजार के मौजूदा सेंटिमेंट पर भू-राजनीतिक घटनाओं और विदेशी निवेशकों की बिकवाली का गहरा असर दिख रहा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने तेल की कीमतों को उछाल दिया है, जहां वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड $97 प्रति बैरल के पार चला गया है। वर्ल्ड बैंक का अनुमान है कि फाइनेंशियल ईयर 27 (FY27) के लिए तेल की कीमतें $90-100 प्रति बैरल के बीच बनी रहेंगी। यह लगातार बढ़ती एनर्जी कॉस्ट इनपुट प्राइस और इम्पोर्टेड इन्फ्लेशन को बढ़ाएगी, जिससे Q1 FY27 में प्रॉफिट मार्जिन पर और दबाव बढ़ेगा। बढ़ते तेल दामों के चलते भारतीय रुपया भी डॉलर के मुकाबले ₹92 के करीब आ गया है, जिससे महंगाई की चिंताएं और गहरा गई हैं।
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने इस दौरान काफी सतर्क रुख अपनाया है। मार्च 2026 में ही उन्होंने रिकॉर्ड ₹1.14 लाख करोड़ (या $12.3 बिलियन) की भारी बिकवाली की। यह किसी एक महीने में सबसे बड़ा आउटफ्लो था, जिससे 2026 में अब तक कुल FII आउटफ्लो लगभग ₹1.27 लाख करोड़ हो चुका है।
इन दबावों के बावजूद, बाजार विश्लेषकों की राय बंटी हुई है। जहां JPMorgan ने अपना Nifty टारगेट घटाया है, वहीं अन्य बड़ी ब्रोकरेज फर्म्स के आउटलुक अलग हैं। Goldman Sachs, जो पहले Nifty के लिए 29,000-29,300 का टारगेट दे रहा था, ने हाल ही में भारतीय स्टॉक्स को 'मार्केटवेट' कर दिया है और 12 महीने का Nifty टारगेट घटाकर 25,300 कर दिया है। वहीं, Morgan Stanley अभी भी बुलिश नजर आ रहा है और दिसंबर 2026 तक Sensex के 95,000 तक पहुंचने की उम्मीद कर रहा है, जो मौजूदा स्तर से 24% की बढ़ोतरी का संकेत है। वर्ल्ड बैंक ने भारत के FY27 GDP ग्रोथ का अनुमान 6.6% लगाया है, जो इसे वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक अहम ग्रोथ इंजन बताता है।
JPMorgan फिलहाल डोमेस्टिक साइक्लिकल स्टॉक्स पर दांव लगाने की सलाह दे रहा है, जिनके कमाई के अनुमान ज्यादा स्पष्ट हैं। हालांकि, IT सेक्टर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के चलते कुछ चुनौतियों का सामना कर रहा है। JPMorgan का अनुमान है कि मैटेरियल्स, रिटेल, हॉस्पिटल्स और ऑटोमोबाइल सेक्टर ग्रोथ में आगे रह सकते हैं, जबकि ऑयल एंड गैस, इंश्योरेंस और EMS जैसे सेक्टर प्रदर्शन को धीमा कर सकते हैं। JPMorgan की कटौतियों का एक बड़ा कारण प्रॉफिट मार्जिन पर बढ़ता दबाव है। बढ़ती इनपुट लागत और महंगाई के कारण, ब्रोकरेज ने भारत के FY27 रियल GDP ग्रोथ अनुमान को 0.5 प्रतिशत अंक कम कर दिया है और विभिन्न सेक्टरों के FY27 के अर्निंग अनुमानों में 2-10% की कटौती की है। Nifty 50 का मौजूदा P/E रेश्यो लगभग 21.1x है, जिसे कुछ विश्लेषक मौजूदा बाजार गिरावट के बाद भी थोड़ा ज्यादा मान रहे हैं।