बढ़ती लागत और ग्लोबल सप्लाई चेन के दबाव के बीच निवेशक अब मिड-कैप कंपनियों की ओर रुख कर रहे हैं। हेल्थकेयर, डिफेंस और पावर यूटिलिटी जैसे सेक्टर की ऐसी कंपनियां रडार पर हैं, जो अपने मजबूत बिजनेस मॉडल के दम पर मार्जिन बनाए रखने में सक्षम हैं।
बाजार में अनिश्चितता का माहौल है और निवेशक आने वाले अर्निंग सीजन के लिए काफी सतर्क नजर आ रहे हैं। कच्चे माल की बढ़ती लागत, मौसम की मार और सप्लाई चेन में रुकावटों के कारण अब बाजार का मूड 'सेलेक्टिव बाइंग' की ओर शिफ्ट हो गया है। निवेशक अब ऐसी मिड-कैप कंपनियों पर दांव लगा रहे हैं, जिनके पास मजबूत 'बिजनेस मोट्स' (Business Moats) हैं, जो बाजार के खराब दौर में भी मजबूती से खड़े रह सकते हैं।
सेक्टर में मजबूती की तलाश
इस चुनौतीपूर्ण माहौल में वे कंपनियां निवेशकों को लुभा रही हैं जो जरूरी सेवाएं देती हैं या जिन्हें सरकारी और औद्योगिक स्तर पर सपोर्ट हासिल है। हेल्थकेयर सेक्टर में Narayana Hrudayalaya अपनी कम लागत और हाई-वॉल्यूम मॉडल के लिए जानी जा रही है। इनका मॉडल इन्फ्लेशन के बावजूद मार्जिन को सुरक्षित रखने में मददगार साबित होता है। वहीं, पावर यूटिलिटी सेक्टर में Torrent Power एक इंटीग्रेटेड प्लेयर है, जो जनरेशन से लेकर डिस्ट्रीब्यूशन तक काम करती है। अपनी कार्यकुशलता और रिन्यूएबल एनर्जी की तरफ बढ़ते कदम इस कंपनी को अलग पहचान देते हैं।
डिफेंस और इंडस्ट्रियल सेक्टर का दम
सरकारी खर्च और स्वदेशी निर्माण पर जोर के कारण डिफेंस सेक्टर लगातार फोकस में है। Bharat Dynamics जैसे पीएसयू (PSU) को लंबे सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स और DRDO के साथ साझेदारी का फायदा मिलता है, जिससे इनका ऑर्डर बुक काफी विजिबल रहता है। दूसरी ओर, इंडस्ट्रियल और ऑटो कंपोनेंट सेक्टर में Usha Martin और Gabriel India जैसे नाम अपने नवाचार (Innovation) के जरिए बाजार में जगह बनाए हुए हैं। उशा मार्टिन इंफ्रास्ट्रक्चर और माइनिंग जैसे क्रिटिकल सेक्टर में काम कर रही है, जबकि गैब्रियल इंडिया इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती मांग के अनुसार खुद को ढाल रही है।
निवेशकों के लिए क्या है मुख्य मंत्र?
आने वाली तिमाहियों में केवल रेवेन्यू ग्रोथ देखना काफी नहीं होगा। निवेशकों को कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन और EBITDA मार्जिन पर बारीक नजर रखनी होगी। साथ ही, डिफेंस ऑर्डर पूरे होने की रफ्तार, पावर प्रोजेक्ट्स का विस्तार और हेल्थकेयर में कैपेसिटी एडिशन जैसे पैरामीटर्स यह तय करेंगे कि कौन सी कंपनी बाजार की अस्थिरता के बीच वैल्यू बनाए रखने में कामयाब रहती है।
