AI के डर से IT कंपनियों में बिकवाली, वैल्यूएशन रीसेट का दौर
AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के खौफ ने भारतीय IT कंपनियों के शेयरों में हाहाकार मचा दिया है। इस हफ्ते Nifty IT इंडेक्स 8.25% से ज्यादा टूट गया, जो पिछले एक साल की सबसे बड़ी गिरावट है। ICICI Prudential AMC के आनंद शाह का कहना है कि यह बिकवाली तुरंत अर्निंग्स (Earnings) के संकट से ज्यादा, 'वैल्यूएशन रीसेट' (Valuation Reset) का नतीजा है। AI से रेवेन्यू और मार्जिन पर क्या असर होगा, यह अभी साफ नहीं है, लेकिन यह लो-एंड (Low-end) के कामों को ऑटोमेट (Automate) कर सकता है। शाह की फर्म IT पर सालों से 'अंडरवेट' (Underweight) बनी हुई है।
IT से आगे: कहां बन रहे हैं मौके?
AI के इस झटके के बीच, आनंद शाह का मानना है कि 2026 एक रिकवरी (Recovery) का साल होगा, जहां स्टॉक पिकिंग (Stock Picking) यानी सही शेयर चुनने का महत्व बढ़ जाएगा। उनका अनुमान है कि यह तेज उछाल की जगह धीरे-धीरे सुधरने वाला साल होगा। इस बीच, मेटल (Metal) और प्रेशियस मेटल्स (Precious Metals) जैसे सेक्टर्स में मौके दिख रहे हैं, जिनका सहारा ग्लोबल रिफ्लेशनरी ट्रेंड्स (Global Reflationary Trends) दे रहे हैं।
IT सेक्टर में AI का दुधारी तलवार वाला असर
AI के कारण भारतीय IT सेक्टर में भारी गिरावट देखी जा रही है। Nifty IT इंडेक्स का P/E रेश्यो (P/E Ratio) लगभग 23.2 के आसपास आ गया है। कुछ एक्सपर्ट्स इसे ठीक-ठाक वैल्यूएशन मान रहे हैं, लेकिन मौजूदा गिरावट डि-रेटिंग (De-rating) का संकेत दे रही है। अमेरिकी टेक स्टॉक्स में भी AI को लेकर ऐसी ही गिरावट देखने को मिल रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि IT कंपनियों की मौजूदा वैल्यूएशन (Valuation) पहले से ही बहुत सस्ती नहीं थी, और अब AI को लेकर अनिश्चितता के कारण इन पर और दबाव आ सकता है।
AI, IT सेक्टर के लेबर-इंटेंसिव (Labor-intensive) और आवरली बिलिंग (Hourly Billing) मॉडल के लिए खतरा पैदा कर सकता है। ईआरपी (ERP) इम्प्लीमेंटेशन और लेगेसी सिस्टम मेंटेनेस (Legacy system maintenance) जैसे काम ऑटोमेट हो सकते हैं, जिससे प्राइजिंग प्रेशर (Pricing Pressure) बढ़ सकता है। कुछ एनालिस्ट्स का मानना है कि एप्लीकेशन सर्विसेज (Application Services), जो कई IT फर्म्स के रेवेन्यू का बड़ा हिस्सा हैं, AI से सीधे तौर पर प्रभावित हो सकती हैं। HCLTech जैसी कंपनियों ने AI के प्रभाव के चलते अपने मार्जिन गाइडेंस (Margin Guidance) को भी एडजस्ट किया है।
मेटल और प्रेशियस मेटल्स में तेजी की उम्मीद
भारतीय GDP ग्रोथ 2025-26 के लिए 6.5% से 7.7% के बीच रहने का अनुमान है, जो मेटल सेक्टर के लिए अच्छा संकेत है। खास तौर पर फेरस स्टॉक्स (Ferrous Stocks) में और तेजी आ सकती है, क्योंकि नॉन-फेरस नेम्स (Non-ferrous names) पहले ही बढ़ चुके हैं। भारत के मेटल और माइनिंग सेक्टर को 2026 में ग्लोबल मैक्रो फैक्टर्स (Global Macro Factors) और डोमेस्टिक डिमांड (Domestic Demand) का सपोर्ट मिल सकता है।
गोल्ड (Gold) और सिल्वर (Silver) में भी निवेश की उम्मीद बनी हुई है। ग्लोबल रिफ्लेशनरी ट्रेंड्स, बढ़ता सरकारी कर्ज और गिरती रियल इंटरेस्ट रेट्स (Real Interest Rates) के कारण लोग ट्रेडिशनल फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट्स (Traditional Financial Instruments) से हटकर इनमें निवेश कर सकते हैं। 2026 में गोल्ड की कीमत $4,500-$4,700 प्रति औंस तक जा सकती है, और अगर मैक्रो कंडीशंस (Macro Conditions) बनी रहीं तो इससे भी ज्यादा हो सकती है। सिल्वर की बात करें तो $65 के टारगेट के पार जाने की उम्मीद है, जिसकी वजह सप्लाई डेफिसिट (Supply Deficits) और इंडस्ट्रियल डिमांड (Industrial Demand) है।
भविष्य की राह: AI को अपनाना ही होगा
IT कंपनियों के भविष्य का रास्ता AI को अपने बिजनेस मॉडल में शामिल करने पर टिका है। कुछ एनालिस्ट्स का मानना है कि AI से एफिशिएंसी (Efficiency) बढ़ेगी, वहीं कुछ इसे एक बड़ा खतरा मान रहे हैं। TCS और Infosys जैसी बड़ी IT कंपनियों के लिए हालिया टारगेट प्राइस (Target Price) मामूली बढ़त का संकेत दे रहे हैं। JPMorgan के एनालिस्ट्स का कहना है कि मौजूदा शेयर की कीमतें बहुत कम टर्मिनल ग्रोथ रेट (Terminal Growth Rates) को दर्शा रही हैं, यानी निवेशक काफी सेफ्टी प्रीमियम (Safety Premium) की मांग कर रहे हैं।
IT सेक्टर को सर्विस डिलीवरी (Service Delivery) से आगे बढ़कर प्रोडक्ट-लेड इनोवेशन (Product-Led Innovation) और आउटकम-बेस्ड मॉडल्स (Outcome-Based Models) की ओर बढ़ना होगा, जिससे वे AI-इन्फ्यूज्ड प्लेटफॉर्म्स (AI-Infused Platforms) का हिस्सा बन सकें। ग्लोबल टेक जायंट्स AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर $650 बिलियन (2026 में) खर्च कर रहे हैं, जो AI रेस की कैपिटल-इंटेंसिव (Capital-Intensive) प्रकृति को दिखाता है। Nasscom का कहना है कि AI, IT सर्विसेस को रिप्लेस (Replace) करने की बजाय ऑग्मेंट (Augment) करेगा, लेकिन इंडस्ट्री के लिए यह एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।