12 सितंबर, 2026 तक India VIX **12.29** के स्तर पर है, जो जियो-पॉलिटिकल तनाव और कच्चे तेल की कीमतों के बीच बाजार के मूड को बयां कर रहा है। इसे 'Fear Gauge' कहा जाता है, जो Nifty 50 की उम्मीदों को समझने में मदद करता है।
12 सितंबर, 2026 तक India VIX लगभग 12.29 के आसपास बना हुआ है, जो निवेशकों को Nifty 50 की अनुमानित उतार-चढ़ाव (volatility) का एक पैमाना दे रहा है। इसे भारतीय शेयर बाजार का 'Fear Gauge' माना जाता है। यह इंडेक्स ऑप्शन प्रीमियम के आधार पर अगले 30 दिनों के लिए अनुमानित सालाना उतार-चढ़ाव की गणना करता है। निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि बाजार फिलहाल शांत है या दबाव में।\n\nIndia VIX पूरी तरह से Nifty 50 के ऑप्शंस की कीमतों से जुड़ा है। जब ट्रेडर्स को बाजार में बड़ी हलचल की उम्मीद होती है, तो ऑप्शन की कीमतें बढ़ जाती हैं, जिससे VIX ऊपर चला जाता है। आमतौर पर इसका Nifty 50 के साथ उल्टा संबंध (inverse correlation) होता है; यानी जब इंडेक्स गिरता है, तो अनिश्चितता बढ़ती है और VIX उछल जाता है।\n\nकई ट्रेडर्स VIX का इस्तेमाल बाजार का बॉटम (bottom) खोजने के लिए करते हैं। तर्क यह है कि VIX में भारी उछाल का मतलब है कि बाजार में डर चरम पर है, जो अक्सर करेक्शन के अंत का संकेत हो सकता है। हालांकि, केवल इस डेटा पर निर्भर रहना जोखिम भरा है। VIX 'नॉन-डायरेक्शनल' टूल है, यानी यह केवल हलचल की तीव्रता बताता है, दिशा नहीं। यह गिरावट के दौरान भी लंबे समय तक ऊपर बना रह सकता है।\n\nइसके अलावा, 'Low-fear' गिरावट पर नजर रखना जरूरी है। यह तब होता है जब Nifty 50 गिरता है, लेकिन VIX स्थिर रहता है। यह इस बात का संकेत है कि बाजार में पैनिक सेलिंग नहीं हो रही है, जिससे रिवर्सल की गुंजाइश कम हो सकती है।\n\nवर्तमान में मिडिल ईस्ट में जियो-पॉलिटिकल तनाव, Brent crude की कीमतें और करेंसी में उतार-चढ़ाव VIX को प्रभावित कर रहे हैं। डेरिवेटिव सेगमेंट में रेगुलेटरी बदलाव भी इसमें हलचल ला सकते हैं। समझदारी इसी में है कि VIX का इस्तेमाल अकेले ट्रेड के लिए नहीं, बल्कि बाजार के ओवरऑल ट्रेंड और रिस्क मैनेजमेंट के साथ एक 'Contextual Overlay' के तौर पर करें।
