अप्रैल डेरिवेटिव्स सीरीज़ में भारतीय शेयर बाज़ार के प्रमुख इंडेक्स में ज़बरदस्त तेज़ी नज़र आई। लेकिन, बाज़ार के आंकड़े कुछ और ही कहानी कह रहे हैं। यह रैली नई निवेशक की मज़बूती (conviction) पर नहीं, बल्कि मुख्य रूप से शॉर्ट कवरिंग (short covering) पर आधारित थी।
जहाँ Nifty 50 में 7.45% और Bank Nifty में 10.19% की उछाल देखी गई, वहीं डेरिवेटिव्स डेटा के अनुसार, दोनों में ओपन इंटरेस्ट (Open Interest) 32% से ज़्यादा गिरा। इसका सीधा मतलब है कि ट्रेडर्स नई पोजीशन बनाने की बजाय अपनी पुरानी पोज़िशन्स को ख़त्म कर रहे थे। Nifty में रोलओवर भागीदारी 71% रही, जो इसके तीन महीने के औसत 72% से थोड़ी कम है। वहीं Bank Nifty का रोलओवर 79% रहा, जो औसत 80% के करीब है।
कमज़ोर नींव पर टिकी तेज़ी
यह तेज़ी असल में उन ट्रेडर्स की वजह से आई जो बाज़ार के गिरने पर दांव (bearish bets) लगा रहे थे और अब अपनी पोजीशन को ख़त्म कर रहे थे। इस तरह की तेज़ी अक्सर टिकाऊ नहीं होती। ओपन इंटरेस्ट का गिरना बताता है कि नई लंबी पोजीशन (long positions) बनाने को लेकर बाज़ार में आत्मविश्वास की कमी थी।
सेक्टर के अनुसार प्रदर्शन और कुछ खास स्टॉक्स
Sun Pharmaceutical Industries Ltd. ने रोलओवर में सबसे ज़्यादा पॉजिटिव डिवीज़न दिखाया, जिससे फार्मा सेक्टर में कुल मिलाकर भागीदारी 94% रही, जो इसके तीन महीने के औसत 92% से बेहतर है। Sun Pharma का P/E रेश्यो लगभग 35-38 के बीच है, जो इंडस्ट्री औसत 31.7 से थोड़ा ऊपर है। ऑयल और गैस सेक्टर में भी स्थिरता दिखी, जहाँ ONGC का रोलओवर तीन महीने के औसत से 8% ज़्यादा था। ONGC का P/E रेश्यो करीब 9-10 है और मार्केट कैपिटलाइज़ेशन लगभग $40 बिलियन है। NHPC, Phoenix Mills, और HDFC Asset Management Company जैसे स्टॉक्स में भी ऐतिहासिक बेंचमार्क से ज़्यादा रोलओवर देखा गया।
हालांकि, टेक्नोलॉजी सेक्टर का ट्रेंड अलग रहा। HCL Technologies Ltd. और Infosys Ltd. में नई शॉर्ट पोजीशन बनती दिखीं। HCL Technologies का P/E रेश्यो करीब 19.5-21.4 है और इसका मार्केट कैप हाल ही में घटा है। Infosys का P/E रेश्यो 16-17.9 के आसपास है, जो इंडस्ट्री औसत 21.14 से कम है और यह शेयर बड़े बाज़ार की तुलना में कमज़ोर प्रदर्शन कर रहा है। Vedanta में रोलओवर भागीदारी में सबसे बड़ी गिरावट देखी गई, जो बाज़ार की सतर्कता को दर्शाता है। इसका P/E रेश्यो 19 से 30 के बीच रहा, जो मेटल सेक्टर के औसत 9.9 से काफी ज़्यादा है।
ज़्यादा रोलओवर कॉस्ट और लार्ज कैप पर फोकस
बाज़ार में पोजीशन कैरी-फॉरवर्ड (carry-forward) मुख्य रूप से कुछ चुनिंदा स्टॉक्स में केंद्रित थी, जिनमें रोलओवर कॉस्ट (rollover costs) भी ज़्यादा थी। Reliance Industries Ltd. में रोलओवर कॉस्ट सबसे ज़्यादा करीब 0.66% रही, जो बताता है कि ट्रेडर्स इस लार्ज-कैप स्टॉक में पोजीशन बनाए रखने के लिए प्रीमियम चुकाने को तैयार थे। Reliance का P/E रेश्यो 22-24 है और मार्केट कैपिटलाइज़ेशन करीब 19.29 ट्रिलियन INR है।
ख़तरे की घंटी: अंदरूनी कमज़ोरी और विदेशी निवेशकों की सतर्कता
मौजूदा बाज़ार सेंटिमेंट के लिए सबसे बड़ा ख़तरा यह है कि यह नई खरीदारियों के बजाय शॉर्ट कवरिंग पर टिका है। ओपन इंटरेस्ट का गिरना पोज़िशन एग्जिट (position exits) का संकेत है, जो मंदी लौटने पर तेज़ गिरावट ला सकता है। भारत में रिटेल इन्वेस्टर्स (retail investors) डेरिवेटिव्स में लगातार घाटा झेल रहे हैं, जिनमें 91% को नेट लॉस हुआ। Foreign Institutional Investors (FIIs) अप्रैल में $4 बिलियन के आउटफ्लो के बावजूद नेट शॉर्ट पोजीशन बनाए हुए थे, जो बाज़ार को लेकर उनकी सतर्कता को दर्शाता है। FIIs ने अपने नेट शॉर्ट कॉन्ट्रैक्ट्स कम किए, लेकिन अपना रुख नहीं बदला।
इसके अलावा, यूनियन बजट के अनुसार, FY27 से डेरिवेटिव्स पर Securities Transaction Tax (STT) में प्रस्तावित वृद्धि ट्रेडिंग की लागत बढ़ा सकती है और रिटेल भागीदारी को हतोत्साहित कर सकती है।
आगे क्या?
बाज़ार की भविष्य की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या फंडामेंटल्स (fundamentals) के आधार पर असली खरीदारी मज़बूती से आती है, जो मौजूदा वैल्यूएशन (valuations) को सहारा दे सके। चुनिंदा पोजीशन, IT जैसे सेक्टर में मंदी की भावना, और विदेशी निवेशकों का सतर्क रुख बताता है कि यह तेज़ी केवल शॉर्ट कवरिंग से आगे बढ़कर असली कनविक्शन पर निर्भर करेगी।
