त्योहारी सीजन के चलते भारत का क्विक कॉमर्स सेक्टर **21.6%** की जबरदस्त तिमाही ग्रोथ की ओर बढ़ रहा है। वहीं, बड़े UPI ट्रांजेक्शन पर **0.4%** मर्चेंट चार्ज के संभावित टलने की खबरों के बीच डिजिटल पेमेंट सेक्टर में भी हलचल है।
त्योहारी सीजन की शुरुआत के साथ ही भारत का क्विक कॉमर्स सेक्टर तेजी से अपने पैर पसार रहा है। फाइनेंशियल ईयर 2027 की दूसरी तिमाही के लिए नेट ऑर्डर वैल्यू में 21.6% की बढ़ोतरी का अनुमान है। अब यह सेक्टर केवल ग्रोसरी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल फोन जैसे महंगे सामानों की डिलीवरी में भी बड़ी हिस्सेदारी बना रहा है।
फेस्टिव डिमांड और मार्केट शेयर
त्योहारों के चलते क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स इस बार कुल ऑनलाइन फेस्टिव स्पेंडिंग का करीब 18% हिस्सा हथिया सकते हैं। यह कैटेगरी साल-दर-साल 110% से 120% की शानदार ग्रोथ दर्ज कर रही है, जबकि फूड डिलीवरी सेगमेंट 18% की स्थिर दर से आगे बढ़ रहा है। हालांकि, कंपनियां अब ग्रोथ के साथ-साथ प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) पर भी ध्यान दे रही हैं। अधिक डिस्काउंट देने के चक्कर में मार्जिन पर दबाव न बढ़े, इसके लिए कंपनियां मिनिमम ऑर्डर वैल्यू बढ़ाने जैसे कदम उठा रही हैं।
UPI मर्चेंट फीस पर सस्पेंस
डिजिटल पेमेंट स्पेस में भी एक बड़ा बदलाव पेंडिंग है। ₹2,000 से ज्यादा के UPI ट्रांजेक्शन पर 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने की डेडलाइन 15 अक्टूबर, 2026 तय थी, लेकिन अब इसके जनवरी 2027 तक टलने की चर्चा है। अगर यह नियम लागू होता है, तो यह केवल बड़े ट्रांजेक्शन पर होगा, जिससे छोटे मर्चेंट्स पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
निवेशकों के लिए चेतावनी
इन्वेस्टर्स को यह समझना होगा कि हाई-वॉल्यूम डिमांड को मैनेज करना कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती है। डार्क स्टोर नेटवर्क और लॉजिस्टिक्स को संभालना चुनौतीपूर्ण है, साथ ही फूड इन्फ्लेशन और खर्च करने के पैटर्न में बदलाव इस ग्रोथ की राह में अड़चन पैदा कर सकते हैं। कंपनियों का असली इम्तिहान यह है कि क्या वे बिना कैश बर्न (Cash Burn) बढ़ाए अपनी इस रफ्तार को बरकरार रख पाएंगी?
