भारत में काम कर रहे Global Capability Centres (GCCs) ने अपनी हायरिंग स्ट्रैटेजी पूरी तरह बदल दी है। अब AI, डेटा साइंस और साइबर सिक्योरिटी जैसे हाई-वैल्यू रोल्स के लिए **30.3%** डिमांड बढ़ गई है। हालांकि, कुल हायरिंग वॉल्यूम में **3.5%** की गिरावट आई है और बाजार में टैलेंट की **42%** तक कमी बनी हुई है।
हाई-वैल्यू रोल्स पर दांव
GCCs अब केवल संख्या बढ़ाने के बजाय इनोवेशन पर ध्यान दे रहे हैं। जुलाई-सितंबर 2026 (Q2 FY27) की रिपोर्ट बताती है कि AI, डेटा साइंस और साइबर सिक्योरिटी में हायरिंग डिमांड 30.3% तक पहुंच गई है। यह बदलाव दर्शाता है कि मल्टीनेशनल कंपनियां अब वॉल्यूम-आधारित भर्ती को छोड़कर इनोवेशन-लेड मॉडल अपना रही हैं।
टैलेंट की कमी और चुनौती
कुल हायरिंग में 3.5% की गिरावट के पीछे मुख्य वजह कंपनियों का 'सेलेक्टिव' होना है। फिलहाल, लगभग 40% भर्तियां नई भूमिकाओं के बजाय रिप्लेसमेंट के रूप में हो रही हैं। सबसे बड़ी चुनौती टैलेंट सप्लाई गैप है—AI और डेटा एनालिटिक्स में यह 38% से 42% और साइबर सिक्योरिटी में 30% से 35% के बीच है। यह कमी प्रोजेक्ट्स में देरी और वेज इन्फ्लेशन (Wage Inflation) का बड़ा कारण बन सकती है।
टियर-2 शहरों का उदय
कॉस्ट कम करने के लिए अब कंपनियां टियर-1 शहरों से आगे निकल रही हैं। कोयंबटूर (Coimbatore) इसका बड़ा केंद्र बन चुका है, जहां हायरिंग डिमांड में 30% की ग्रोथ दर्ज की गई है। निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि GCCs और लिस्टेड IT कंपनियों के बीच टैलेंट के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा जारी रहेगी, जिससे सेक्टर में वेतन का दबाव (Wage Pressure) बना रह सकता है।
