विदेशी निवेशकों का बड़ा खेल! भारतीय बाज़ार में बदली चाल, Telecom और Metals में निवेश, Banks से पैसा निकाला

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
विदेशी निवेशकों का बड़ा खेल! भारतीय बाज़ार में बदली चाल, Telecom और Metals में निवेश, Banks से पैसा निकाला
Overview

भारतीय शेयर बाज़ार में विदेशी निवेशकों (FIIs) की चाल में बड़ा बदलाव आया है। कुल मिलाकर, FIIs ने भारतीय इक्विटी में अपनी हिस्सेदारी काफी कम कर दी है, जो कई सालों के निचले स्तर पर है। लेकिन यह एक बड़ी बिकवाली नहीं, बल्कि एक खास रणनीति के तहत किया गया बदलाव है। वे अब चुनिंदा सेक्टर्स जैसे टेलीकॉम, कैपिटल गुड्स, मेटल्स और इंफ्रास्ट्रक्चर में पैसा लगा रहे हैं।

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FIIs की रणनीति में बड़ा उलटफेर

विदेशी निवेशक भारतीय शेयरों में निवेश करने का अपना तरीका बदल रहे हैं। अब वे सीधे किसी भी स्टॉक में पैसा लगाने के बजाय, खास सेक्टर्स पर फोकस कर रहे हैं। यह बदलाव तब आया है जब भारतीय इक्विटी में FIIs की कुल हिस्सेदारी लगभग एक दशक के निचले स्तर पर पहुँच गई है। निवेशक ऐसी कंपनियों की तलाश में हैं जहाँ कमाई (Earnings) अच्छी हो और जिनकी ग्लोबल अपील हो। डोमेस्टिक इन्वेस्टर्स इस बिकवाली को संभालने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

चुनिंदा सेक्टर्स में लगा रहे पैसा

विश्लेषण से पता चलता है कि FIIs ने कई कंपनियों के शेयर बेचे हैं, लेकिन उनका पैसा चुनिंदा सेक्टर्स में आया है। टेलीकॉम और कैपिटल गुड्स को खास फायदा हुआ है, जहाँ क्रमशः $2.91 बिलियन और $2.89 बिलियन का निवेश आया है। मेटल्स में भी $2.25 बिलियन का सकारात्मक इनफ्लो देखा गया। इसके बिल्कुल उलट, बैंकिंग, कंज्यूमर और टेक्नोलॉजी स्टॉक्स से काफी पैसा बाहर निकला है। Bharti Airtel, GE Vernova T&D, Adani Ports और Hindalco Industries जैसी कंपनियों में FIIs की हिस्सेदारी बढ़ी है।

डोमेस्टिक इन्वेस्टर्स का दमदार सहारा

FIIs की कुल बिकवाली के बावजूद, डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) ने उन भारतीय स्टॉक्स में अपनी होल्डिंग्स को लगातार बढ़ाया है जहाँ FIIs ने पैसा निकाला है। DIIs की इस मजबूत मांग ने विदेशी बिकवाली के असर को कम किया है और प्रमुख भारतीय शेयरों को सहारा दिया है। उदाहरण के लिए, Bharti Airtel में FIIs की होल्डिंग 22.7% से बढ़कर 28.8% हो गई, और GE Vernova T&D में यह 0.7% से बढ़कर 18.5% हो गई।

सेक्टर्स में बदलाव के पीछे की वजहें

सरकार के ₹12.2 लाख करोड़ के कैपिटल एक्सपेंडिचर प्लान (Financial Year 2026-27) कैपिटल गुड्स और इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा दे रहे हैं, जिससे स्टील जैसी चीजों की मांग बढ़ रही है। भारत का स्टील मार्केट वैश्विक स्तर पर अनोखा है, जिसके 2034 तक सालाना करीब 6% की दर से बढ़ने की उम्मीद है। वहीं, AI और क्लाउड के बढ़ते इस्तेमाल से IT सेक्टर में भी तेजी देखी जा रही है। टेलीकॉम सेक्टर भी एक ग्रोथ इंजन बना हुआ है; Bharti Airtel में 2023 से 2026 के बीच 46% की सालाना EPS ग्रोथ का अनुमान है।

कंपनियों का प्रदर्शन और एनालिस्ट्स की राय

Bharti Airtel का P/E रेश्यो 31-36 के बीच है और इसका मार्केट कैप लगभग ₹10.54 ट्रिलियन है। Adani Ports का मार्केट कैप ₹4.07 ट्रिलियन है और P/E 30-32 के आसपास है; ज़्यादातर एनालिस्ट इसे 'खरीदने' की सलाह दे रहे हैं, जिनमें करीब 10-11% के अपसाइड की गुंजाइश दिख रही है। Hindalco Industries मेटल्स सेक्टर में घरेलू मांग के सहारे चल रही है। JSW Steel के लिए एनालिस्ट्स की राय मिली-जुली है, जिनकी टारगेट प्राइस INR 975 से INR 1,601 तक है। Axis Bank में मजबूत लोन ग्रोथ दिख रही है, लेकिन मार्जिन पर दबाव है; इसके प्राइस टारगेट में काफी भिन्नता है। KPIT Technologies को आमतौर पर पॉजिटिव रेटिंग मिली है, पर इसके प्राइस टारगेट में भी काफी अंतर है, जो 13% से 54% तक के अपसाइड की ओर इशारा करते हैं। हालांकि, KPIT के EBIT मार्जिन हाल ही में गिरे हैं। One 97 Communications (Paytm) का P/E रेश्यो 100 से ऊपर है और पिछले तीन सालों से इसका रिटर्न ऑन इक्विटी नेगेटिव रहा है, जो वैल्यूएशन को लेकर चिंताएं पैदा करता है।

अभी भी बने हुए हैं जोखिम

हालांकि, इस सेक्टर रोटेशन के बावजूद जोखिम बने हुए हैं। टेलीकॉम सेक्टर में रेगुलेटरी अनिश्चितताएं और कड़ी प्रतिस्पर्धा है। मेटल्स प्रोड्यूसर्स वैश्विक मांग में नरमी, खासकर चीन से, और कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से प्रभावित हो सकते हैं। IT फर्म्स को लागत बढ़ने और हाई-वैल्यू सर्विसेज की ओर बढ़ने की जरूरत से मार्जिन पर दबाव का सामना करना पड़ सकता है।

बाज़ार का आउटलुक

एनालिस्ट्स Adani Ports जैसी कंपनियों पर पॉजिटिव बने हुए हैं, जिनमें कई 'Buy' रेटिंग्स और आकर्षक टारगेट प्राइस हैं। Axis Bank के लिए भी 'Strong Buy' की आम सहमति है। IT और मेटल्स जैसे सेक्टर्स के लिए एनालिस्ट्स की राय अलग-अलग है, जो ग्रोथ ड्राइवर्स के बावजूद मार्जिन प्रेशर और सेक्टर चैलेंजेज का जिक्र कर रहे हैं। कुल मिलाकर, विदेशी कैपिटल का रुख चुनिंदा रहेगा, जो मजबूत कमाई और कॉम्पिटिटिव एज वाली कंपनियों पर फोकस करेगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.