जून 2026 तक Nifty 50 कंपनियों में डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) की हिस्सेदारी रिकॉर्ड **25.9%** पर पहुंच गई है। यह बड़े-कैप स्टॉक्स में स्थिरता की ओर एक बड़ा बदलाव दर्शाता है।
DIIs का बड़ा दांव: Nifty 50 में हिस्सेदारी रिकॉर्ड स्तर पर
भारतीय शेयर बाजार में डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) का दबदबा बढ़ता जा रहा है। जून 2026 को समाप्त तिमाही के आंकड़ों के अनुसार, Nifty 50 इंडेक्स की कंपनियों में DIIs की हिस्सेदारी बढ़कर रिकॉर्ड 25.9% हो गई है। यह साफ तौर पर बड़े-कैप स्टॉक्स की ओर पूंजी के रोटेशन का संकेत है, क्योंकि DIIs लगातार फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) की बिकवाली को थाम रहे हैं।
FIIs की बिकवाली, DIIs की खरीदारी
जून 2026 के आंकड़ों से बाजार में भागीदारी का एक स्पष्ट पैटर्न सामने आया है। FIIs ने 50 में से 36 Nifty 50 कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी घटाई है, जो इंडेक्स का 72% है। वहीं, डोमेस्टिक इन्वेस्टर्स इन कंपनियों में 41 में खरीदारी करते दिखे हैं। यह ट्रेंड, जिसमें DIIs फॉरेन इन्वेस्टर्स की बिकवाली को सोख रहे हैं, 2026 में भारतीय बाजार की एक प्रमुख विशेषता रही है। इस साल अब तक DIIs का इनफ्लो ₹5 लाख करोड़ के पार निकल गया है।
Max Healthcare में दिखा बदलाव
इस स्ट्रक्चरल रोटेशन का एक उदाहरण Max Healthcare जैसी कंपनियों में देखा जा सकता है। हालिया तिमाही में, इस स्टॉक में FIIs की हिस्सेदारी लगभग 13% घटी, जबकि DIIs की हिस्सेदारी लगभग 12.5% बढ़ी। इससे पता चलता है कि डोमेस्टिक पैसा बड़े और स्थापित नामों में कैसे निवेश कर रहा है।
स्मॉल-कैप से दूरी, लार्ज-कैप पर फोकस
बड़े-कैप स्टॉक्स को तरजीह देने का एक मुख्य कारण स्मॉल- और मिड-कैप (SMID) सेगमेंट में आई तेज रैली है। पिछले कुछ सालों में SMID स्टॉक्स कई रिटेल और इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स के पसंदीदा रहे हैं। हालांकि, इनमें से कुछ छोटी कंपनियों के प्राइस-टू-अर्निंग मल्टीपल ऐतिहासिक औसत से काफी ऊपर चले गए हैं। ऐसे में, एनालिस्ट्स इन सेगमेंट्स को लेकर सतर्क हो गए हैं।valuation की चिंता के कारण पूंजी अब बड़े-कैप इंडेक्स की स्थिरता और अपेक्षाकृत अधिक अनुमानित अर्निंग्स की ओर बढ़ रही है।
आगे क्या?
इस बदलाव के बावजूद, इन्वेस्टर्स एक जटिल माहौल में हैं। ग्लोबल जियोपॉलिटिकल टेंशन, जैसे कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य के पास सप्लाई चेन की चिंताएं, और लगातार बनी हुई इन्फ्लेशन का दबाव फॉरेन कैपिटल फ्लो को प्रभावित कर सकता है। कैपिटल-इंटेंसिव बैंकिंग और कंजम्पशन जैसे सेक्टर्स में भी रिस्क बने हुए हैं, जहां क्रेडिट ग्रोथ और कंज्यूमर डिमांड भविष्य की अर्निंग्स पर असर डाल सकती है।
बाजार के जानकारों का अनुमान है कि Nifty 50 इंडेक्स की अर्निंग्स FY27 में मजबूत ग्रोथ दिखाएंगी। आने वाले महीनों में, तिमाही अर्निंग्स रिपोर्ट्स, महंगाई के आंकड़े और लार्ज-कैप व मिड-कैप कंपनियों के valuation में अंतर का घटना प्रमुख मॉनिटरिंग पॉइंट होंगे।
