Nifty 50: Bernstein ने घटाया लक्ष्य, अब 25,000 के स्तर पर टिकीं निगाहें

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Nifty 50: Bernstein ने घटाया लक्ष्य, अब 25,000 के स्तर पर टिकीं निगाहें

ग्लोबल ब्रोकरेज Bernstein ने Nifty 50 के लिए अपना ईयर-एंड टारगेट घटाकर **25,000** कर दिया है। ब्रोकरेज ने मार्केट की ऊंची वैल्यूएशन और धीमी अर्निंग्स ग्रोथ के बीच के अंतर को लेकर निवेशकों को आगाह किया है।

ब्रोकरेज फर्म Bernstein ने भारतीय बाजार पर अपना रुख बदलते हुए Nifty 50 के लिए साल के अंत का लक्ष्य 28,100 से घटाकर 25,000 कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, अब बाजार में वैल्यूएशन के दम पर होने वाली आसान कमाई का दौर खत्म होता दिख रहा है। मुख्य समस्या बाजार की कीमतों और कंपनियों की वास्तविक कमाई (Corporate Earnings) के बीच बढ़ता फासला है।\n\n### वैल्यूएशन और अर्निंग्स का गणित\n\nहालांकि, Nifty का फॉरवर्ड P/E रेशियो घटकर 16.6x के करीब यानी छह साल के निचले स्तर पर आ गया है, लेकिन Bernstein का मानना है कि इसे अभी भी 'सस्ता' नहीं कहा जा सकता। इसकी वजह यह है कि अर्निंग्स मोमेंटम केवल 7% से 8% की धीमी रफ्तार से बढ़ रहा है। जब शेयर की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और मुनाफा उस रफ्तार से नहीं बढ़ता, तो बाजार में एक ऐसा रिस्क पैदा हो जाता है जहाँ निवेशक 'परफेक्शन' की उम्मीद कर रहे हैं, जो कंपनियों के नतीजों में दिखाई नहीं दे रहा।\n\n### बाहरी रिस्क और ग्लोबल कॉम्पिटिशन\n\nभारतीय बाजार के लिए विदेशी पूंजी जुटाना भी अब चुनौती बन गया है। ग्लोबल निवेशक फिलहाल आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी ग्रोथ की तलाश में हैं, जहाँ साउथ कोरिया और ताइवान जैसे बाजार ज्यादा फायदेमंद दिख रहे हैं।\n\nइसके अलावा, क्रूड ऑयल की कीमतें भी भारतीय बाजार के लिए सिरदर्द बनी हुई हैं। भारत अपनी जरूरत का 85% कच्चा तेल आयात करता है। Bernstein के मुताबिक, क्रूड ऑयल की कीमतों में $5 की बढ़ोत्तरी होने पर कंपनियों की अर्निंग्स ग्रोथ में लगभग 200 बेसिस पॉइंट्स की गिरावट आ सकती है। इसका असर शिपिंग से लेकर केमिकल और एग्रीकल्चर तक की सप्लाई चेन पर पड़ता है।\n\n### निवेशकों को क्या देखना चाहिए?\n\nअर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए सरकारी खर्च अब एक सीमा तक पहुंच चुका है। चूंकि प्राइवेट सेक्टर की तरफ से निवेश की गति धीमी है, इसलिए बाजार अब एक अधिक सीमित (Selective) माहौल में प्रवेश कर सकता है। आने वाले समय में निवेशकों के लिए यह देखना जरूरी होगा कि कंपनियां मार्जिन के दबाव को कैसे संभालती हैं और क्या उनकी अर्निंग्स की क्वालिटी बरकरार रहती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.