भारत में **52** बिजनेस साइट्स के हालिया ऑडिट में **4,694** बार नियमों के उल्लंघन का मामला सामने आया है। हैरान करने वाली बात यह है कि इनमें से लगभग आधी खामियों के लिए कंपनी के सीनियर मैनेजमेंट और डायरेक्टर्स को जेल तक हो सकती है।
TeamLease RegTech की रिपोर्ट ने भारतीय कॉर्पोरेट जगत में गवर्नेंस को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। इस ऑडिट में जो खामियां मिली हैं, वे केवल कागजी गलतियां नहीं हैं। करीब 70.4% उल्लंघनों में कानूनी दंड का प्रावधान है। सबसे गंभीर बात यह है कि 46.1% मामलों में जेल की सजा हो सकती है, जो सीधे तौर पर कंपनी के बोर्ड, सीनियर ऑफिसर्स और फैक्ट्री ऑक्यूपायर्स के लिए बड़ा खतरा है।
लेबर और सेफ्टी कानूनों में सबसे ज्यादा खामियां
रिपोर्ट के मुताबिक, कुल उल्लंघनों में 91.7% मामले लेबर और पर्यावरण, स्वास्थ्य एवं सुरक्षा (EHS) नियमों से जुड़े हैं। विशेष रूप से वेयरहाउस और डिपो इन खतरों के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील पाए गए हैं, जहां हर लोकेशन पर औसतन 58.2 खामियां दर्ज की गई हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि कॉन्ट्रैक्ट लेबर पर ज्यादा निर्भरता और साइट सुपरवाइजर्स की सुस्त निगरानी इसके मुख्य कारण हैं।
निवेशकों के लिए सबक
शेयरधारकों को यह समझने की जरूरत है कि ऑपरेशनल गवर्नेंस उतनी ही अहम है जितना कि फाइनेंशियल परफॉर्मेंस। नियमों का पालन न करने पर कंपनियों को न केवल भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है, बल्कि ऑपरेशन बंद होने और साख खराब होने का भी रिस्क रहता है।
निवेशकों के लिए सलाह है कि वे सालाना रिपोर्ट में 'मैनेजमेंट डिस्कशन एंड एनालिसिस' सेक्शन को ध्यान से पढ़ें। जो कंपनियां कंप्लायंस मॉनिटरिंग के लिए ऑटोमेशन का उपयोग कर रही हैं या जिनके पास मजबूत EHS ऑडिट का ट्रैक रिकॉर्ड है, वे लंबी अवधि में अधिक सुरक्षित मानी जाती हैं।
