वर्ल्ड बैंक ने भारत के रूफटॉप सोलर प्रोग्राम को सपोर्ट करने के लिए ₹8,500 करोड़ (890 मिलियन डॉलर) की मंजूरी दी है। इस स्कीम का मकसद 2027 तक 1 करोड़ घरों तक पहुंचना है। इस फंड से ₹40,000 करोड़ का प्राइवेट इन्वेस्टमेंट आने और 17 लाख से ज्यादा नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है।
भारत की सोलर क्रांति को वर्ल्ड बैंक का साथ
वर्ल्ड बैंक ने भारत के महत्वाकांक्षी 'PM सूर्य घर: मुफ़्त बिजली योजना' के लिए आधिकारिक तौर पर 890 मिलियन डॉलर, यानी करीब ₹8,500 करोड़ की फंडिंग को मंजूरी दे दी है। इस बड़े फाइनेंशियल पैकेज का लक्ष्य घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम को तेजी से अपनाना है। सरकार की मंशा है कि मार्च 2027 तक 1 करोड़ घरों को इस योजना से जोड़ा जाए। इस योजना के तहत, चुनिंदा परिवारों को हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली मिलेगी, जिससे उनका बिजली का बिल कम होगा और देश की रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता भी बढ़ेगी।
फंडिंग का ढांचा और प्राइवेट इन्वेस्टमेंट
इस प्रोजेक्ट के लिए वर्ल्ड बैंक इंटरनेशनल बैंक फॉर रिकंस्ट्रक्शन एंड डेवलपमेंट (IBRD) से 820 मिलियन डॉलर का लोन देगा। इसके अलावा, 60 मिलियन डॉलर का कंसेशनल लोन (concessional loan) और 10 मिलियन डॉलर की ग्रांट (grant) भी शामिल है। इस लोन के अलावा, एक और अहम बात यह है कि इस व्यवस्था के तहत 4.2 बिलियन डॉलर, यानी लगभग ₹40,000 करोड़ का प्राइवेट कैपिटल जुटाने का भी लक्ष्य है। यह पैसा कमर्शियल लेंडर्स (commercial lenders) के ज़रिए आएगा और उन घर खरीदारों व छोटे बिजनेसमैन की मदद करेगा जो सोलर इंफ्रास्ट्रक्चर लगाना चाहते हैं।
रिन्यूएबल एनर्जी और रोज़गार पर असर
यह योजना भारत के रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर के लिए एक बड़े बूस्टर का काम करेगी। वर्ल्ड बैंक का अनुमान है कि इस प्रोजेक्ट से 17 लाख से ज्यादा रोज़गार पैदा होंगे। ये नौकरियां सोलर पैनल और इन्वर्टर बनाने से लेकर, उनकी इंस्टॉलेशन और मेंटेनेंस तक, पूरी वैल्यू चेन (value chain) में फैलेंगी। ऐतिहासिक रूप से, वर्ल्ड बैंक भारत के सोलर सेक्टर में सक्रिय रहा है और पिछले दशक में देश की रूफटॉप सोलर क्षमता को 500 MW से बढ़ाकर 27 GW से ज़्यादा करने में मदद की है।
किन कंपनियों पर पड़ सकता है असर?
इन्वेस्टर्स (investors) और मार्केट एक्सपर्ट्स (market experts) इस बात पर नज़र रखेंगे कि यह कैपिटल इनफ्यूज़न (capital infusion) सोलर इक्विपमेंट बनाने वाली कंपनियों पर कैसा असर डालता है। इसमें सोलर मॉड्यूल (solar module), इन्वर्टर (inverter) और स्ट्रक्चरल कंपोनेंट्स (structural components) बनाने वाली कंपनियां शामिल हैं। हालांकि, इस बड़े पैमाने के प्रोग्राम का सफल एग्जीक्यूशन (execution) सरकारी सब्सिडी (subsidy) के समय पर मिलने और स्थानीय बिजली वितरण कंपनियों की क्षमता पर निर्भर करेगा, ताकि वे हज़ारों नए सोलर रूफटॉप को ग्रिड (grid) से इंटीग्रेट (integrate) कर सकें। यह देखना होगा कि घर कितनी तेजी से इन सिस्टम्स को अपनाते हैं और सोलर एनर्जी सप्लाई चेन (supply chain) की कंपनियों के लिए यह कितनी डिमांड पैदा करता है।
