बजट 2026 का सोलर बूस्ट
बजट 2026 में सोलर सेक्टर के लिए ₹30,000 करोड़ से ज़्यादा की भारी-भरकम राशि का आवंटन किया गया है। इस कदम का सीधा मकसद भारत को सोलर मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भर बनाना और डोमेस्टिक प्रोडक्शन को ज़बरदस्त तरीके से बढ़ाना है। सरकार ने रॉ-मटेरियल पर टैक्स में भी कटौती का ऐलान किया है, जो इस सेक्टर के लिए एक बड़ा बूस्ट साबित हो रहा है। जहां बड़े कॉरपोरेट्स अक्सर सुर्खियों में रहते हैं, वहीं असली ग्रोथ की कहानी छिपी हुई, खासकर छोटी और स्पेशलाइज्ड कंपनियों में।
Indosolar Ltd: टर्नअराउंड की मिसाल
Waaree Energies द्वारा NCLT प्रोसेस के ज़रिए एक्वायर की गई Indosolar Ltd, सोलर फोटोवोल्टेइक सेल्स बनाने वाली एक जानी-मानी कंपनी है। एक्विजिशन के बाद हुए रीस्ट्रक्चरिंग के चलते जून 2025 में कंपनी ने री-लिस्टिंग की। तब से कंपनी ने शानदार वापसी की है। Indosolar का ROCE (रिटर्न ऑन कैपिटल एम्प्लॉयड) 77% है, जो इंडस्ट्री के एवरेज 28% से कहीं ज़्यादा है। कंपनी लगभग डेट-फ्री है, इसका डेट-टू-इक्विटी रेशियो सिर्फ 0.02 है, जो इसकी मज़बूत फाइनेंशियल हेल्थ को दिखाता है।
फाइनेंशियल ईयर 2020 में जहां सेल्स ज़ीरो थी, वहीं फाइनेंशियल ईयर 2025 में यह ₹324 करोड़ तक पहुंच गई। फाइनेंशियल ईयर 2026 के पहले तीन क्वार्टर में ही करीब ₹600 करोड़ की सेल्स दर्ज की गई। एक्विजिशन के बाद EBITDA पॉजिटिव हुआ, जो फाइनेंशियल ईयर 2025 में ₹95 करोड़ और फाइनेंशियल ईयर 2026 के पहले तीन क्वार्टर में ₹206 करोड़ रहा। नेट प्रॉफिट भी नेगेटिव से पॉजिटिव हुआ, फाइनेंशियल ईयर 2025 में ₹55 करोड़ और फाइनेंशियल ईयर 2026 के शुरुआती नौ महीनों में ₹204 करोड़ का मुनाफा हुआ। शेयर की कीमत में भी एक बड़ा उछाल देखा गया है, जो 2021 की शुरुआत में ₹2.5 के आसपास थी, वो 6 फरवरी 2026 तक बढ़कर ₹434 पर पहुंच गई। 7x के PE रेश्यो पर ट्रेड कर रहा यह स्टॉक, इंडस्ट्री के 40x के PE के मुकाबले काफी सस्ता लग रहा है।
Waaree Renewable Technologies Ltd: EPC का पावरहाउस
Waaree Group की एक अहम सब्सिडियरी Waaree Renewable Technologies Ltd, सोलर EPC (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट, और कंस्ट्रक्शन) बिज़नेस को लीड करती है। कंपनी का ROCE 82% है, जो इंडस्ट्री के लगभग 20% के एवरेज से बहुत ज़्यादा है। इसका डेट-टू-इक्विटी रेशियो भी सिर्फ 0.12 है, जो इसे फाइनेंशियली साउंड बनाता है।
कंपनी की सेल्स में भी ज़बरदस्त ग्रोथ देखने को मिली है। फाइनेंशियल ईयर 2020 में सिर्फ ₹6 करोड़ की सेल्स से यह फाइनेंशियल ईयर 2025 में ₹1,598 करोड़ पर पहुंच गई। यह 209% का कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) है। फाइनेंशियल ईयर 2026 के पहले तीन क्वार्टर में सेल्स ₹2,229 करोड़ दर्ज की गई। EBITDA में भी 215% का CAGR देखा गया, जो फाइनेंशियल ईयर 2025 में ₹311 करोड़ और फाइनेंशियल ईयर 2026 के शुरुआती नौ महीनों में ₹435 करोड़ रहा। नेट प्रॉफिट फाइनेंशियल ईयर 2020 में ₹3 करोड़ के लॉस से बढ़कर फाइनेंशियल ईयर 2025 में ₹229 करोड़ और Q3FY26 तक ₹322 करोड़ हो गया। शेयर की कीमत फरवरी 2021 के करीब ₹6 से बढ़कर 6 फरवरी 2026 तक ₹901 पर पहुंच गई। 24x के PE पर ट्रेड कर रहा यह स्टॉक, इंडस्ट्री के 27x के PE के करीब है, लेकिन इसके पास ₹3,500 करोड़ से ज़्यादा का अन-एग्जीक्यूटेड ऑर्डर बुक है, जो फ्यूचर रेवेन्यू की गारंटी देता है।
वैल्यूएशन और फ्यूचर आउटलुक
Indosolar और Waaree Renewable Technologies, दोनों ही कंपनियां भारतीय सोलर मार्केट के बढ़ते हुए अवसरों का फायदा उठाने के लिए पूरी तरह तैयार दिख रही हैं। Indosolar का अट्रैक्टिव वैल्यूएशन और Waaree Renewable का बड़ा ऑर्डर बुक, साथ ही सरकार की सपोर्टिव पॉलिसीज़, इन दोनों को एनर्जी ट्रांजिशन के इस दौर का बड़ा लाभार्थी बना सकती हैं। मौजूदा मार्केट प्राइसिंग से लगता है कि इन स्टॉक्स में पोटेंशियल मिस-प्राइसिंग हो सकती है, जो लॉन्ग-टर्म सोलर पावर ग्रोथ में विश्वास रखने वाले निवेशकों के लिए एक अच्छा एंट्री पॉइंट साबित हो सकता है।