एनर्जी वैल्यू चेन में बड़ा विस्तार
यह महत्वाकांक्षी योजना Waaree Energies को सिर्फ सोलर मॉड्यूल बनाने वाली कंपनी से आगे ले जाएगी। अब यह बैटरी मैन्युफैक्चरिंग, हाइड्रोजन इलेक्ट्रोलाइजर और इनवर्टर जैसे नए और अहम क्षेत्रों में भी कदम रखेगी। कंपनी का लक्ष्य एनर्जी वैल्यू चेन में गहराई तक इंटीग्रेशन हासिल करना है। इस विस्तार के लिए ₹10,000 करोड़ की Qualified Institutional Placement (QIP) को भी मंजूरी मिल गई है।
क्षमता विस्तार पर बड़ा फोकस
इस ₹30,000 करोड़ के कुल निवेश में से लगभग ₹2,000-3,000 करोड़ पहले ही खर्च किए जा चुके हैं। Waaree अपनी सोलर सेल क्षमता को दिसंबर तक बढ़ाकर 15 GW करने वाली है, जो अभी 5.4 GW है। साथ ही, अगले 12-15 महीनों में 10 GW की इनगॉट (Ingot) और वेफर (Wafer) उत्पादन क्षमता स्थापित करने का लक्ष्य है। मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता जल्द ही 28 GW तक पहुंच जाएगी, और कंपनी अमेरिका में नई फैसिलिटीज भी लगा रही है।
बैटरी और ग्रीन हाइड्रोजन में भी एंट्री
सिर्फ यहीं नहीं, Waaree बैटरी मैन्युफैक्चरिंग के मैदान में भी उतर रही है। शुरुआत में 3.5 GW की लिथियम आयरन फॉस्फेट (LFP) सेल क्षमता और FY28 तक 16.5 GW का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा, कंपनी इनवर्टर और हाइड्रोजन इलेक्ट्रोलाइजर का उत्पादन भी शुरू करेगी, जिसमें 1 GW की इलेक्ट्रोलाइजर परियोजना शामिल है। ओमान में एक पॉलीसिलिकॉन प्लांट में हिस्सेदारी हासिल करके Waaree कच्चे माल से लेकर तैयार माल तक एंड-टू-एंड इंटीग्रेशन हासिल करने वाली है, जिससे यह चीन के बाहर ऐसी क्षमता वाली गिनी-चुनी कंपनियों में शामिल हो जाएगी।
बाजार की चाल और तुलना
बाजार में Waaree Energies के शेयर फिलहाल लगभग 29-30 के प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेशियो पर ट्रेड कर रहे हैं। यह निवेशकों के कंपनी की ग्रोथ को लेकर उम्मीदों को दर्शाता है। हालांकि, यह Adani Green Energy जैसे प्रतिस्पर्धियों से काफी कम है, जिनके P/E मल्टीपल अक्सर 130 से ऊपर होते हैं। Tata Power भी अपने रिन्यूएबल ऑपरेशंस का विस्तार कर रहा है, जिसमें ₹6,500 करोड़ का निवेश शामिल है।
भारत सरकार घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम चला रही है, जिसमें सोलर और हाइड्रोजन सेगमेंट के लिए लगभग ₹2,700-2,800 करोड़ आवंटित किए गए हैं। हालांकि, बैटरी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को फिलहाल इस तरह का सीधा पॉलिसी सपोर्ट नहीं मिल रहा है, भले ही सरकार की ₹18,100 करोड़ की एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (ACC) PLI स्कीम धीमी प्रगति पर है। वहीं, नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन की बदौलत भारत में ग्रीन हाइड्रोजन मार्केट तेजी से बढ़ने वाला है।
एग्जीक्यूशन रिस्क और हालिया नतीजे
Waaree की इस बड़ी और व्यापक विस्तार योजना में एग्जीक्यूशन (Execution) से जुड़े जोखिम भी हैं। बैटरी सेल, हाइड्रोजन इलेक्ट्रोलाइजर और एडवांस्ड सोलर कंपोनेंट्स जैसी जटिल टेक्नोलॉजी को इंटीग्रेट करने के लिए कुशल प्रोजेक्ट मैनेजमेंट और बड़े निवेश की जरूरत होगी। हालिया वित्तीय प्रदर्शन ने भी कुछ चिंताएं बढ़ाई हैं। Q4 FY26 के नतीजों के बाद कंपनी के शेयर 11% गिर गए थे। इसका मुख्य कारण EBITDA मार्जिन का 18.6% रहना रहा, जो बाजार की 21-25% की उम्मीदों से कम था। एनालिस्ट्स का मानना है कि प्रोडक्ट मिक्स में बदलाव, मॉड्यूल उत्पादन की बढ़ी हुई लागत और नई सेल टेक्नोलॉजी में शिफ्ट होने के कारण यह गिरावट आई। Waaree के पास सोलर और हाइड्रोजन के लिए PLI अप्रूवल हैं, लेकिन बैटरी डिवीजन के लिए खास पॉलिसी सपोर्ट की कमी एक चुनौती बन सकती है। ग्लोबल सोलर सेक्टर को पहले भी US anti-dumping duty investigations से बाधाओं का सामना करना पड़ा है, जो फिर से उभर सकता है।
भविष्य की उम्मीदें
FY27 के लिए Waaree Energies ऑपरेटिंग EBITDA ₹7,000–7,700 करोड़ के बीच रहने का अनुमान लगा रही है, जो FY26 के ₹5,900 करोड़ से ज्यादा है। यह अनुमान बढ़ी हुई क्षमता के उपयोग और अपने विस्तृत, इंटीग्रेटेड ऑपरेशंस से होने वाले फायदों पर निर्भर करता है। कंपनी का लक्ष्य एनर्जी ट्रांजिशन सॉल्यूशंस का एक कॉम्प्रिहेंसिव प्रोवाइडर बनना है, और वह मॉड्यूल, स्टोरेज, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, ट्रांसमिशन और EPC सेवाओं में ग्राहकों के 90% से अधिक खर्च को टारगेट कर रही है। यह महत्वाकांक्षी रणनीतिक कदम Waaree को क्लीनर एनर्जी की ओर बढ़ते वैश्विक रुझान का फायदा उठाने के लिए तैयार करता है।
