दोहरी जीत से कंपनी की धूम
Waaree Energies की पूरी तरह से मालिकाना हक वाली सब्सिडियरी Waaree Forever Energies Private Ltd. ने सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SECI) से गुजरात के द्वारका में 300 MW के एक बड़े विंड पावर प्रोजेक्ट के लिए लेटर ऑफ अवार्ड (LOA) हासिल किया है। इस प्रोजेक्ट के साथ 25 साल का पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) जुड़ा है, जो कंपनी के लिए लंबे समय तक चलने वाली और स्थिर कमाई का जरिया बनेगा।
विंड प्रोजेक्ट की इस बड़ी खबर के ठीक बाद, कंपनी को एक प्रमुख घरेलू सोलर पावर डेवलपर से 500 MW सोलर मॉड्यूल सप्लाई करने का ऑर्डर भी मिला है। यह ऑर्डर फाइनेंशियल ईयर 2027 (FY27) के लिए एक बार का कॉन्ट्रैक्ट है। यह डील Waaree की दोहरी भूमिका को दिखाती है - एक ओर जहां कंपनी खुद प्रोजेक्ट डेवलप कर रही है, वहीं दूसरी ओर वह तेजी से बढ़ते सोलर वैल्यू चेन में एक अहम सप्लायर भी है।
बाजार में शानदार प्रतिक्रिया और मजबूत नतीजे
इन रणनीतिक जीतों पर बाजार ने शानदार प्रतिक्रिया दी। 24 फरवरी 2026 को, NSE पर Waaree Energies के शेयर 4.26% की उछाल के साथ ₹3,040.00 पर बंद हुए। इस दौरान 22.9 लाख (2.29 million) शेयरों का वॉल्यूम ट्रेड हुआ।
यह शेयर की तेजी कंपनी के हालिया मजबूत फाइनेंशियल परफॉर्मेंस के अनुरूप है। Waaree Energies ने फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) की तीसरी तिमाही (Q3) में साल-दर-साल (YoY) 119% की जबरदस्त बढ़ोतरी के साथ ₹7,565 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया। वहीं, नेट प्रॉफिट में 115% की तेजी आई और यह ₹1,062 करोड़ रहा। कंपनी के EBITDA मार्जिन सुधरकर 25.5% पर पहुंच गए, जो बेहतर ऑपरेशनल एफिशिएंसी को दर्शाता है। Waaree Energies के पास लगभग ₹60,000 करोड़ का एक बड़ा ऑर्डर बुक है, जो आने वाले सालों के लिए रेवेन्यू की अच्छी विजिबिलिटी देता है।
डायवर्सिफिकेशन और सेक्टर की चाल
Waaree Energies की रणनीति, जिसमें बड़े पैमाने पर प्रोजेक्ट डेवलपमेंट (जैसे विंड) और मैन्युफैक्चरिंग/सप्लाई (जैसे सोलर मॉड्यूल) दोनों को शामिल करना है, रेवेन्यू का एक डायवर्सिफाइड बेस तैयार करती है। कंपनी का P/E रेश्यो फिलहाल 25-29x के आसपास है, और मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग ₹85-87 बिलियन है। वहीं, कंपनी पर ज़ीरो डेट (Zero Debt) है, जो वित्तीय समझदारी को दर्शाता है। तुलना करें तो Adani Green Energy का P/E 86-116x और मार्केट कैप लगभग ~₹160 बिलियन है, जबकि Adani Green पर डेट-टू-इक्विटी रेश्यो 4.5 है। Tata Power का P/E 27-31x और मार्केट कैप लगभग ~₹121 बिलियन है, जिसका डेट-टू-इक्विटी रेश्यो 1.86 है। Sterling and Wilson Renewable Energy, जो एक प्रमुख EPC प्लेयर है, को नेगेटिव P/E रेश्यो और लगभग ~₹4.9 बिलियन के मार्केट कैप का सामना करना पड़ रहा है।
भारत का रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है। अक्टूबर 2025 तक इंस्टॉल्ड कैपेसिटी 250.6 GW तक पहुंच चुकी है और 2030 तक 500 GW का लक्ष्य है। सरकार की डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने वाली नीतियां, जैसे सेल और वेफर प्रोडक्शन को बढ़ावा देना, इस सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण हैं। गुजरात और उत्तर प्रदेश जैसे राज्य इस क्षेत्र में नीतियों को आगे बढ़ाने में सबसे आगे हैं, जो Waaree जैसी कंपनियों के लिए अनुकूल माहौल बना रहे हैं।
जोखिम और चिंताएं
इन सकारात्मक खबरों के बावजूद, कुछ ऐसे फैक्टर भी हैं जिन पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है। 500 MW का सोलर मॉड्यूल सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट साफ तौर पर एक "वन-टाइम" (One-Time) ऑर्डर बताया गया है। यह 25 साल के PPA वाले विंड प्रोजेक्ट के विपरीत, मैन्युफैक्चरिंग सेगमेंट में आय की अस्थिरता पैदा कर सकता है। कुछ एनालिस्ट्स के मुताबिक, Waaree का वैल्यूएशन, हालांकि कुछ तेजी से बढ़ रहे साथियों की तुलना में आकर्षक है, फिर भी 'महंगा' माना जा रहा है। कंपनी कुछ उद्योग वर्गीकरणों में व्यापक बाजार औसत की तुलना में अपने P/E रेश्यो को ऊंचा रखती है। इसके अलावा, कंपनी पर अमेरिकी CBP की जांच और इनकम टैक्स की जांच जैसी रिपोर्टें भी सामने आई हैं, जो रेगुलेटरी और लीगल जोखिम पैदा करती हैं। Sterling and Wilson के नेगेटिव P/E रेश्यो के साथ इसकी तुलना रिन्यूएबल एनर्जी सप्लाई चेन और EPC सेगमेंट के अंदर अस्थिरता और अलग-अलग परिणामों को दर्शाती है।
भविष्य की राह और एनालिस्ट्स की राय
भविष्य को लेकर एनालिस्ट्स का नजरिया मोटे तौर पर आशावादी बना हुआ है। 11 एनालिस्ट्स ने 'Buy' रेटिंग दी है। 12 महीने के लिए औसत प्राइस टारगेट ₹3,422.73 है, जो मौजूदा स्तरों से लगभग 17.4% की संभावित बढ़ोतरी का संकेत देता है। कुछ अनुमानों में यह टारगेट ₹4,400 तक भी जाता है। जनवरी 2026 में Nomura द्वारा ₹3,750 के प्राइस टारगेट के साथ 'Buy' रेटिंग बनाए रखने जैसे हालिया ब्रोकर एक्शन भी इस पॉजिटिव सेंटिमेंट को मजबूत करते हैं। हालांकि, Bernstein और Kotak जैसी फर्मों से Sell-side रिकमेन्डेशन भी मौजूद हैं, जो इसके शॉर्ट-टू-मीडियम टर्म की दिशा पर अलग-अलग विचारों को उजागर करते हैं।