Vikram Solar Share: बड़ा ऑर्डर मिला, पर शेयर क्यों गिरा? US टैरिफ का डर!

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Vikram Solar Share: बड़ा ऑर्डर मिला, पर शेयर क्यों गिरा? US टैरिफ का डर!
Overview

अमेरिका से आने वाले संभावित टैरिफ (tariffs) की चिंताओं के चलते Vikram Solar के शेयरों में **5%** से ज्यादा की गिरावट आई है, भले ही कंपनी ने NTPC Green Energy और Indian Oil से गुजरात प्रोजेक्ट के लिए **378 MW** क्षमता वाले एडवांस्ड N-TOPCon सोलर मॉड्यूल का बड़ा ऑर्डर हासिल किया हो।

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सोलर इंडस्ट्री में क्या चल रहा है?

Vikram Solar को NTPC Green Energy और Indian Oil के जॉइंट वेंचर प्रोजेक्ट के लिए 378 MW क्षमता वाले N-TOPCon सोलर मॉड्यूल सप्लाई करने का बड़ा ऑर्डर मिला है। यह डील कंपनी की एडवांस्ड टेक्नोलॉजी अपनाने की क्षमता और बड़े यूटिलिटी-स्केल प्रोजेक्ट्स हासिल करने की काबिलियत को दर्शाती है।

जब नतीजों पर भारी पड़ी बाहरी चिंताएं

बाजार में 5% से ज्यादा की गिरावट 25 फरवरी 2026 को देखी गई। इस गिरावट की वजह भारत से सोलर प्रोडक्ट्स पर अमेरिका द्वारा लगाए जा सकने वाले संभावित इंपोर्ट ड्यूटी (import duty) की खबरें थीं। यह गिरावट ऐसे समय में आई जब कंपनी के फाइनेंशियल नतीजे काफी मजबूत थे।

दमदार नतीजे, फिर भी शेयरों में गिरावट?

Vikram Solar ने फाइनेंशियल ईयर 2026 की तीसरी तिमाही (Q3 FY26) में पिछले साल की तुलना में 416% का जोरदार प्रॉफिट बूस्ट दर्ज किया। कंपनी का रेवेन्यू (revenue) ₹1,106 करोड़ रहा, जो कि मॉड्यूल बिक्री 796 MW से आया। इसके बावजूद, कंपनी का शेयर अपने लिस्टिंग प्राइस ₹338 (अगस्त 2025) से लगभग आधा होकर 25 फरवरी 2026 को ₹175-₹192 के बीच ट्रेड कर रहा था। कंपनी के पास 10.6 GW का मजबूत ऑर्डर बुक है, जो पिछले साल से 28% ज्यादा है।

वैल्यूएशन पर सवालिया निशान

Vikram Solar का मार्केट कैप करीब ₹6,421 करोड़ से ₹6,784 करोड़ के बीच है, और इसका P/E रेश्यो लगभग 14.1 से 14.93 है। वहीं, सेक्टर की दूसरी बड़ी कंपनियां जैसे Waaree Energies का मार्केट कैप करीब ₹87,000 करोड़ और P/E रेश्यो 25.57 से 38.8 के बीच है। Premier Energies का मार्केट कैप ₹33,000-₹35,000 करोड़ और P/E रेश्यो करीब 26.48 है। यह दिखाता है कि Vikram Solar का वैल्यूएशन अपने प्रतिस्पर्धियों की तुलना में काफी कम है।

सेक्टर की चुनौतियां और आगे का रास्ता

भारत का सोलर मार्केट दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बनने की ओर अग्रसर है, और 50 GW से ज्यादा की अतिरिक्त क्षमता 2026 तक जुड़ने की उम्मीद है। हालांकि, देश में मैन्युफैक्चरिंग क्षमता (मॉड्यूल के लिए 170 GW से ज्यादा) घरेलू मांग से कहीं ज्यादा बढ़ गई है। जून 2026 में ALMM List 2 लागू होने से सप्लाई चेन पर दबाव आ सकता है, क्योंकि डोमेस्टिक सेल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता में कमी है। N-TOPCon जैसी एडवांस्ड टेक्नोलॉजी अब एक अहम अंतर पैदा कर रही है, क्योंकि इनपुट लागत और पॉलिसी बदलावों के कारण मॉड्यूल की कीमतें बढ़ने की आशंका है।

निवेशकों के लिए क्या है खास?

US इंपोर्ट ड्यूटी का जोखिम विक्रम सोलर के एक्सपोर्ट पोटेंशियल को प्रभावित कर सकता है। भले ही कंपनी के पास बड़ा ऑर्डर बुक और मजबूत टेक्नोलॉजी है, लेकिन IPO के बाद वैल्यूएशन में आई गिरावट और कम P/E रेश्यो निवेशकों की चिंताओं को दिखाता है। प्रमोटर की कुछ होल्डिंग गिरवी (pledged) है और पिछले तीन सालों में प्रमोटर होल्डिंग में कमी भी आई है। तेजी से बढ़ती मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और मांग-आपूर्ति का असंतुलन भी एक बड़ी चुनौती है।

भविष्य की राह

10.6 GW का ऑर्डर बुक और N-TOPCon टेक्नोलॉजी में मिली सफलता, विक्रम सोलर को भारत के रिन्यूएबल एनर्जी लक्ष्यों का फायदा उठाने में मदद करेगी। कंपनी के मजबूत वित्तीय नतीजे ऑपरेशनल एफिशिएंसी में सुधार का संकेत देते हैं। हालांकि, वर्तमान वैल्यूएशन और ग्लोबल ट्रेड पॉलिसी पर निर्भरता स्टॉक में अस्थिरता बनाए रख सकती है। आगे चलकर कंपनी को ट्रेड कॉम्प्लेक्सिटीज, सप्लाई चेन के मुद्दों और बढ़ती प्रतिस्पर्धा को चतुराई से संभालना होगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.