Utility-Led Aggregation (ULA) मॉडल ने **2,20,000** सोलर इंस्टॉलेशन का आंकड़ा पार कर लिया है। PM Surya Ghar योजना के तहत अब डिस्कॉम्स (Discoms) खुद सोलर सिस्टम लगा रहे हैं, जिससे गरीब परिवारों पर पड़ने वाला भारी खर्च खत्म हो गया है।
ULA मॉडल कैसे बदल रहा है तस्वीर?
पारंपरिक सोलर सिस्टम में एक आम घर को ₹1 लाख से ₹2 लाख तक का शुरुआती खर्च करना पड़ता था, जो कई परिवारों के लिए नामुमकिन था। अब ULA मॉडल के तहत राज्य की बिजली वितरण कंपनियां (Discoms) खुद ही एग्रीगेटर की भूमिका निभा रही हैं। ये कंपनियां सामूहिक रूप से बल्क टेंडरिंग करती हैं, जिससे सोलर उपकरण सस्ते हो जाते हैं और ग्राहकों को शुरुआती आर्थिक बोझ से मुक्ति मिल जाती है।
राज्यवार आंकड़े और लक्ष्य
फिलहाल इस मिशन में आंध्र प्रदेश 1,40,000 इंस्टॉलेशन के साथ सबसे आगे है, वहीं ओडिशा में 74,000 यूनिट्स लगाई गई हैं। यह पूरी कवायद 'PM Surya Ghar: Muft Bijli Yojana' का अहम हिस्सा है, जिसके तहत देशभर में 45 लाख से ज्यादा मानक इंस्टॉलेशन पूरे किए जा चुके हैं। सरकार का लक्ष्य मार्च 2027 तक 1 करोड़ घरों तक सोलर पावर पहुंचाने का है, जिसके लिए 12 राज्यों को मंजूरी मिल चुकी है।
डिस्कॉम्स के लिए नई चुनौती
निवेशकों और सेक्टर एक्सपर्ट्स की नजरें डिस्कॉम्स की फाइनेंशियल हेल्थ पर हैं। हालांकि यह मॉडल सब्सिडी के बोझ को कम करने में मददगार है, लेकिन प्रोक्योरमेंट और लंबे समय तक रखरखाव (O&M) की जिम्मेदारी बढ़ने से इन कंपनियों पर ऑपरेशनल लोड भी बढ़ सकता है। बाजार में अब यह देखना होगा कि क्या बचत, मेंटेनेंस के खर्चों को कवर कर पाएगी या नहीं। साथ ही, प्राइवेट वेंडर्स के लिए भी इस सरकारी मॉडल के कारण कॉम्पिटिटिव लैंडस्केप बदल सकता है।
