भारत के सोलर रूफटॉप मार्केट में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात ने बाजी मार ली है। सितंबर 2026 में देश की कुल नई क्षमता का **45%** हिस्सा इन्हीं राज्यों से आया है, हालांकि इंस्टॉलेशन की रफ्तार लगातार तीसरे महीने धीमी हुई है।
भारत में घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाने का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। 'PM Surya Ghar: Muft Bijli Yojana' के तहत उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात इस बदलाव के मुख्य केंद्र बनकर उभरे हैं। सितंबर 2026 में कुल नई क्षमता का 45% इन्हीं तीन राज्यों से आया है। इसमें उत्तर प्रदेश 234.46 MW के साथ सबसे आगे रहा, जबकि महाराष्ट्र ने 208.04 MW और गुजरात ने 165.6 MW की नई क्षमता जोड़ी। इस योजना की कुल संचयी (cumulative) क्षमता अब 17,561 MW तक पहुंच गई है।
सब्सिडी का 'अफोर्डेबिलिटी इफेक्ट'
इस ग्रोथ के पीछे सरकारी सब्सिडी एक बड़ा कारण है। रिपोर्ट के मुताबिक, जिन इलाकों में बिजली की दरें कम हैं, वहां सोलर लगाना पहले किफायती नहीं था, लेकिन सब्सिडी ने इस बाधा को खत्म कर दिया है। वर्तमान में लगभग 60% इंस्टॉलेशन उन क्षेत्रों में हुए हैं, जो बिना इस वित्तीय मदद के सोलर को नहीं अपनाते।
मोमेंटम में क्यों दिख रही है सुस्ती?
अंकों की चमक के बावजूद, धरातल पर काम की रफ्तार धीमी पड़ रही है। राष्ट्रीय स्तर पर मासिक क्षमता वृद्धि लगातार तीसरे महीने गिरी है। सितंबर में यह आंकड़ा 1,357.52 MW रहा, जो जुलाई में 1,592 MW था। समस्या यह नहीं है कि लोग आवेदन नहीं कर रहे (सितंबर में 6,00,000+ आवेदन आए), बल्कि चुनौती यह है कि इन आवेदनों को ऑपरेशनल सोलर सिस्टम में कैसे बदला जाए।
निवेशकों के लिए जोखिम और चुनौतियां
इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स और इंस्टॉलेशन फर्म्स के लिए सबसे बड़ी चिंता कन्वर्जन रेट की है। ग्रिड कनेक्टिविटी और अप्रूवल प्रोसेस में आने वाली देरी एक बड़ा बॉटलनेक (bottleneck) बनी हुई है। इसके अलावा, पैनल और सेल के कच्चे माल के लिए आयात पर निर्भरता और सरकारी टेंडर्स में बढ़ती प्रतिस्पर्धा कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव डाल रही है। भविष्य में इस सेक्टर की ग्रोथ पूरी तरह से सरकारी अप्रूवल प्रोसेस को सुव्यवस्थित करने और सब्सिडी फ्लो बनाए रखने पर टिकी होगी।
