उत्तर प्रदेश, रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन में देश का सिरमौर बन गया है। PM सूर्य घर मुफ़्त बिजली योजना और राज्य की अपनी सब्सिडी के चलते, यहाँ **1,02,000** से ज़्यादा सोलर सिस्टम लग चुके हैं। राज्य देश की मासिक सोलर क्षमता का **20%** हिस्सा जोड़ रहा है। प्रॉपर्टी टैक्स में छूट और बढ़े हुए वेंडरों की बदौलत यह विस्तार रिन्यूएबल एनर्जी सर्विस प्रोवाइडर्स और मैन्युफैक्चरर्स के लिए नए मौके खोल रहा है।
घरों की छतों पर छाया सोलर का सूरज!
उत्तर प्रदेश, रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में देश का लीडर बनकर उभरा है। राज्य की राजधानी लखनऊ में देश में सबसे ज़्यादा रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन दर्ज किए गए हैं। ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, यूपी ने सफलतापूर्वक 1,02,000 से अधिक रूफटॉप सोलर सिस्टम लगवा दिए हैं। यह यूपी के एनर्जी प्रोफाइल में एक बड़ा बदलाव है, जहाँ अब राज्य देश की कुल मासिक रूफटॉप सोलर क्षमता वृद्धि का 20% से ज़्यादा योगदान दे रहा है।
सब्सिडी और सालों की बचत
सोलर अपनाने की इस रफ़्तार की मुख्य वजह है 'PM सूर्य घर मुफ़्त बिजली योजना', जिसे राज्य सरकार की ₹30,000 तक की अतिरिक्त सब्सिडी का साथ मिला है। इन वित्तीय छूटों का मकसद मध्यम-आय वाले परिवारों के लिए रिन्यूएबल एनर्जी को किफायती बनाना है। केंद्र और राज्य की मिली-जुली मदद से ग्राहकों की शुरुआती लागत काफी कम हो गई है। अनुमान है कि एक स्टैंडर्ड 3-किलोवाट सिस्टम पर, घर 3 से 4 साल में अपनी लागत वसूल लेंगे, क्योंकि बिजली बिल में भारी बचत होगी। मज़े की बात यह है कि ये सिस्टम 25 साल तक चलने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
सोलर वेंडरों का जाल बिछा
इतनी तेज़ी से काम होने के पीछे एक अहम कारण सर्विस इंफ्रास्ट्रक्चर का मज़बूत होना है। राज्य में सोलर वेंडरों की संख्या जो पहले करीब 600 थी, अब बढ़कर लगभग 6,000 हो गई है। वेंडरों की संख्या में यह 10 गुना का उछाल डिमांड को संभालने और आफ्टर-सेल्स सर्विस देने के लिए ज़रूरी था। इसके अलावा, राज्य सरकार ने लगभग 6% की ब्याज दर पर कंसेशनल बैंक लोन को भी बढ़ावा दिया है, जिसने खरीदारों के लिए शुरुआती बड़ी लागत की बाधा को दूर किया है।
चुनौतियाँ और सेक्टर की सीमाएँ
जहां घरों में सोलर लगने की रफ़्तार अच्छी है, वहीं दूसरे सेगमेंट्स में कुछ दिक्कतें हैं। कमर्शियल और इंडस्ट्रियल रूफटॉप सोलर की मांग फिलहाल कम है। इसकी मुख्य वजह यह है कि ग्रिड को अतिरिक्त बिजली बेचने पर मिलने वाला मुआवज़ा, घरों के लिए मिलने वाले फायदों के मुकाबले कम आकर्षक है। इसके अलावा, प्रगति में एक बड़ा भौगोलिक अंतर भी देखा जा रहा है। पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों में सोलर अपनाने की दर कम है, जिसकी वजह कम शहरी घनत्व और लोकल सोलर वेंडरों का कमज़ोर नेटवर्क है।
निवेशकों और मार्केट से जुड़े लोगों के लिए, आगे का रास्ता इस बात पर निर्भर करेगा कि क्या राज्य इस सफलता को कमर्शियल सेक्टर में दोहरा पाता है और ग्रामीण या कम घनी आबादी वाले जिलों में सोलर को बढ़ावा दे पाता है। इस मॉडल की निरंतरता सब्सिडी की उपलब्धता, राज्य बिजली बोर्डों की ग्रिड इंटीग्रेशन क्षमता और वेंडरों के नेटवर्क की लंबी अवधि की परफॉरमेंस पर टिकी होगी।
