Tata Power ने आने वाले सालों में अपने रूफटॉप सोलर बिजनेस से कमाई को 6 गुना बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। कंपनी 2029 तक **₹30,000 करोड़** का रेवेन्यू हासिल करना चाहती है।
Detailed Coverage
रूफटॉप सोलर से बड़ा दांव
Tata Power Company Ltd ने अपने रूफटॉप सोलर डिवीजन के लिए एक बड़ी ग्रोथ स्ट्रैटेजी तैयार की है। कंपनी का लक्ष्य है कि 2029 तक इस बिजनेस से सालाना ₹30,000 करोड़ का रेवेन्यू कमाया जाए। यह पिछले फाइनेंशियल ईयर में दर्ज ₹4,800 करोड़ के मुकाबले काफी बड़ा उछाल है। कंपनी के मैनेजमेंट का मानना है कि भारत में सोलर एनर्जी को तेजी से अपनाया जा रहा है, जिसके पीछे सरकारी नीतियां और सोलर कंपोनेंट्स व बैटरी स्टोरेज की घटती कीमतें अहम हैं।
मार्केट में बादशाहत कायम करने की तैयारी
कंपनी अगले कुछ सालों में अपनी मार्केट हिस्सेदारी को मौजूदा 13% से बढ़ाकर 25% करने की योजना बना रही है। मैनेजमेंट ने बताया कि मंथली इंस्टॉलेशन (मासिक इंस्टॉलेशन) में जबरदस्त बढ़त हुई है, जो दो साल पहले 1,000 यूनिट्स से बढ़कर अब 30,000 यूनिट्स प्रति माह हो गई है। Tata Power का बिजनेस मॉडल वैल्यू चेन के हर पहलू को कवर करता है - सोलर सेल और मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग से लेकर इंस्टॉलेशन और मेंटेनेंस तक। इस वर्टिकल इंटीग्रेशन से कंपनी अपने बिखरे हुए कॉम्पिटिटर्स से आगे रहने की कोशिश कर रही है।
हालिया परफॉरमेंस और ऑपरेशनल ग्रोथ
FY27 की अप्रैल-जून तिमाही में, Tata Power के रूफटॉप सोलर बिजनेस ने 371 MWp की कैपेसिटी इंस्टॉल की, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 37% ज्यादा है। इसके अलावा, कंपनी के सोलर मैन्युफैक्चरिंग डिवीजन ने इसी तिमाही में 1,001 MW का प्रोडक्शन टारगेट पूरा किया। ये आंकड़े बताते हैं कि कंपनी रेजिडेंशियल और कमर्शियल सोलर सिस्टम्स की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए अपनी रिन्यूएबल एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को तेजी से बढ़ा रही है।
बिजनेस का नजरिया और निगरानी
जहां कंपनी तेजी से विस्तार कर रही है, वहीं निवेशकों को इस विस्तार की कैपिटल इंटेंसिटी (पूंजी-गहनता) पर भी ध्यान देना होगा। जैसे-जैसे Tata Power मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क में निवेश कर रही है, सेक्टर में संभावित कंपटीशन और कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच कंपनी की प्रॉफिट मार्जिन बनाए रखने की क्षमता महत्वपूर्ण होगी। इसके अलावा, कंपनी के सामने एक बड़ी चुनौती यह भी है कि इतने बड़े पैमाने पर मंथली इंस्टॉलेशन को संभालते हुए हाई-क्वालिटी सर्विस स्टैंडर्ड्स को कैसे बनाए रखा जाए, चाहे वह 1 kW के छोटे रेजिडेंशियल सेटअप हों या 20 kW तक के बड़े कमर्शियल प्रोजेक्ट्स।
निवेशक भविष्य की तिमाही नतीजों में इन ग्रोथ रेट्स की स्थिरता पर नजर रख सकते हैं। खासकर, ऑर्डर बुक एग्जीक्यूशन (ऑर्डर निष्पादन) और इन महत्वाकांक्षी लक्ष्यों के मुकाबले असल रेवेन्यू प्राप्ति के ट्रेंड्स पर ध्यान देना होगा। इस स्ट्रैटेजी की सफलता सरकार की सब्सिडी (सब्सिडी) की निरंतर उपलब्धता और कंपनी की इंस्टॉलेशन कॉस्ट को प्रतिस्पर्धी बनाए रखने की क्षमता पर भी निर्भर करेगी, ताकि भारत के विशाल कंज्यूमर मार्केट के एक बड़े हिस्से को सेवा दी जा सके।
