मुनाफे पर क्यों पड़ा असर?
कंपनी के मैनेजमेंट के मुताबिक, चौथी तिमाही में ₹1,000 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया गया, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 4% कम है। इस गिरावट की मुख्य वजह 16,000 करोड़ रुपये के रेवेन्यू पर 8% की कमी और मुंद्रा प्लांट का संचालन रुकना रहा। हालांकि, कंपनी के लिए राहत की बात यह रही कि EBITDA 5% की बढ़ोतरी के साथ ₹3,660 करोड़ पर पहुंच गया। यह उछाल खासतौर पर सोलर मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग, ओडिशा के डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियाँ (Discoms) और रूफटॉप सोलर (0.67 GWp) से मिले मजबूत प्रदर्शन का नतीजा है।
बाजार में क्या है वैल्यूएशन?
11 मई 2026 तक, Tata Power का शेयर लगभग ₹418.40 पर ट्रेड कर रहा था। कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब ₹1.34 ट्रिलियन है, और इसका ट्रेलिंग बारह महीने का P/E रेश्यो लगभग 35.33 है। यह वैल्यूएशन NTPC (जो 16-25 के P/E पर ट्रेड कर रहा है) से ज्यादा है, लेकिन Adani Green Energy जैसी हाई-ग्रोथ रिन्यूएबल डेवलपर से कम है। पिछले कुछ नतीजों में कंपनी के रेवेन्यू ग्रोथ को प्रॉफिट में बदलने में लगातार मुश्किलों का सामना करना पड़ा है, जैसा कि Q3 FY26 में नेट प्रॉफिट में 25.1% की गिरावट से जाहिर हुआ।
भविष्य की योजनाएं और ग्रोथ के दांव
Tata Power भारत के बढ़ते एनर्जी सेक्टर में अपनी पैठ मजबूत करने की तैयारी में है। कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2027 और 2028 में 2.5 GW की रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता जोड़ने की योजना बनाई है। साथ ही, यह दो स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) प्रोजेक्ट्स के जरिए न्यूक्लियर पावर में भी संभावनाएं तलाश रही है, जो फिलहाल व्यवहार्यता (feasibility) और विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) चरणों में हैं। सोलर वेफर और इनगोट क्षमता का विस्तार भी किया जा रहा है। इन कदमों का मकसद भारत की अनुमानित बिजली मांग (2026 तक करीब 270 GW) और गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों पर बढ़ते फोकस का फायदा उठाना है।
चुनौतियां और जोखिम
हालांकि, कंपनी को महत्वपूर्ण एग्जीक्यूशन बाधाओं और वित्तीय जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है। प्रमुख ट्रांसमिशन लाइनों और प्रोजेक्ट लैंड की मंजूरी में देरी का असर कैपिटल एक्सपेंडिचर (CapEx) लक्ष्यों पर पड़ा है। Tata Power पर 5.06 गुना के डेट टू EBITDA रेश्यो के साथ काफी कर्ज भी है, जो वित्तीय लचीलेपन को सीमित करता है। मुंद्रा प्लांट, जो 1 अप्रैल 2026 से एक नए सप्लाई एग्रीमेंट के तहत फिर से चालू हुआ है, ऐतिहासिक रूप से कंपनी के लिए एक वित्तीय बोझ रहा है और पिछले टैरिफ विवादों से अनिश्चितता बनी हुई है। फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए अनुमानित कैपिटल एक्सपेंडिचर ₹25,000 करोड़ पर ऊंचा बना हुआ है।
एनालिस्ट्स की राय बंटी हुई
Tata Power की भविष्य की संभावनाओं पर एनालिस्ट्स की राय बंटी हुई है। जहां ICICI सिक्योरिटीज ने ₹485 के टारगेट प्राइस के साथ 'बाय' रेटिंग बरकरार रखी है, वहीं Bernstein ने भी 'बाय' रेटिंग दी है। दूसरी ओर, Jefferies और MarketsMOJO जैसी फर्मों ने 'सेल' रेटिंग दी है। Morgan Stanley ने स्टॉक को 'होल्ड' पर डाउनग्रेड किया है। हालांकि, कुल मिलाकर कंसेंसस 'मॉडरेट बाय' का है, लेकिन प्राइस टारगेट की विस्तृत रेंज कंपनी के भविष्य पर अलग-अलग नजरिए को दर्शाती है।
