Tata Power ने पश्चिम बंगाल में **500 MW** की सोलर क्षमता विकसित करने की योजना बनाई है। इसके लिए कंपनी **₹2,500 करोड़** का बड़ा निवेश करेगी। कंपनी ने चुनौतियों को देखते हुए छोटे क्लस्टर्स में प्रोजेक्ट्स बांटने की रणनीति तैयार की है।
जमीन की चुनौती और कंपनी की रणनीति
Tata Power अब पश्चिम बंगाल सरकार के साथ मिलकर बड़े सोलर प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है। हालांकि, बड़े पैमाने पर जमीन मिलने में आ रही दिक्कतों को देखते हुए कंपनी ने एक स्मार्ट रास्ता अपनाया है। कंपनी अब 100 MW से 200 MW के छोटे क्लस्टर्स में काम करेगी, ताकि जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया आसान हो सके।
'घर-घर सोलर' पर जोर
केवल यूटिलिटी-स्केल प्रोजेक्ट्स ही नहीं, कंपनी अपनी 'घर-घर सोलर' पहल को भी जोर-शोर से आगे बढ़ा रही है। इसके जरिए कंपनी घरों की छतों पर सोलर पैनल और बैटरी स्टोरेज समाधान मुहैया करा रही है। कंपनी के मैनेजमेंट ने पश्चिम बंगाल सरकार से ओड़िशा और असम की तर्ज पर सब्सिडी और वित्तीय प्रोत्साहन की मांग की है, ताकि रेजिडेंशियल सेक्टर में तेजी लाई जा सके।
निवेशकों के लिए क्या हैं रिस्क?
निवेशकों को इस खबर को सतर्कता से देखना चाहिए। पश्चिम बंगाल में इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया लंबी हो सकती है, जिससे प्रोजेक्ट्स के पूरा होने में देरी का रिस्क बना रहता है। साथ ही, कंपनी जिस तरह से अलग-अलग राज्यों में भारी कैपिटल एक्सपेंडिचर कर रही है, उसे देखते हुए आने वाली तिमाही नतीजों में कंपनी का कर्ज और ब्याज भुगतान क्षमता (Interest Coverage Ratio) पर नजर रखना बेहद जरूरी होगा।
बढ़ता मुकाबला
रेनेवेबल एनर्जी सेक्टर में Adani Green और JSW Energy जैसी दिग्गज कंपनियां पहले से ही मजबूती से काम कर रही हैं। ऐसे में Tata Power के लिए रेगुलेटरी मंजूरियां और समय पर प्रोजेक्ट पूरा करना सफलता की कुंजी साबित होगा। बाजार की नजर अब आधिकारिक जमीन समझौतों और सब्सिडी पॉलिसी पर टिकी है।
