तमिलनाडु सरकार ने अपने 2026-27 के बजट में बड़ा ऐलान किया है। अब राज्य में घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाने के लिए प्रति परिवार **₹1 लाख** तक की सब्सिडी दी जाएगी। यह केंद्र की PM Surya Ghar योजना के साथ मिलकर काम करेगी और रिन्यूएबल एनर्जी को बढ़ावा देगी। बजट में बिजली के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए BESS पॉलिसी और स्मार्ट मीटर लगाने की भी बात कही गई है।
सब्सिडी का ऐलान
तमिलनाडु सरकार ने 2026-27 के बजट में रिन्यूएबल एनर्जी पर खास जोर दिया है। बजट का एक मुख्य आकर्षण है घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाने के लिए नई राज्य-स्तरीय सब्सिडी, जिसके तहत ग्राहकों को ₹1 लाख तक की छूट मिलेगी। इस योजना के लिए ₹50 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है। यह कदम केंद्र सरकार की 'PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana' का पूरक होगा, जिसका लक्ष्य गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों की तरह तमिलनाडु में भी सोलर रूफटॉप के इस्तेमाल को बढ़ाना है।
इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रिड को मजबूती
सब्सिडी के अलावा, राज्य सरकार अपने पावर ग्रिड को आधुनिक बनाने की भी योजना बना रही है। इसके तहत नई बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) प्रमोशन पॉलिसी लाई जाएगी। इसका मकसद बैटरी टेक्नोलॉजी में प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को आकर्षित करना है, जो पीक डिमांड को मैनेज करने और सोलर-विंड पावर की अस्थिरता को संतुलित करने के लिए ज़रूरी है। इसके साथ ही, चेन्नई के सभी उपभोक्ताओं और राज्य भर के 50 लाख इंडस्ट्रियल व कमर्शियल उपभोक्ताओं के लिए स्मार्ट मीटर लगाने का भी प्लान है। इन तकनीकी सुधारों से ट्रांसमिशन लॉस कम होगा और बिलिंग सिस्टम बेहतर होगा।
इन्वेस्टमेंट और एग्जीक्यूशन पर फोकस
बजट में बढ़ते रिन्यूएबल कैपेसिटी को सपोर्ट करने के लिए भारी इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च का भी प्रस्ताव है। 'ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर प्रोजेक्ट (Phase-II)' को तेजी से पूरा किया जाएगा ताकि तमिलनाडु के दक्षिणी हिस्सों से पैदा होने वाली बिजली को ग्रिड तक पहुंचाया जा सके। साथ ही, 178 नए सब-स्टेशनों के निर्माण और 40,000 पुराने ट्रांसफॉर्मरों को बदलने के लिए भी बड़ा फंड रखा गया है। ये ट्रांसमिशन नेटवर्क के सुधार राज्य की ग्रिड विश्वसनीयता को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण हैं, खासकर जब रिन्यूएबल एनर्जी का हिस्सा बढ़ रहा है।
वित्तीय और ऑपरेशनल जोखिम
हालांकि रिन्यूएबल एनर्जी पर जोर दिया जा रहा है, लेकिन निवेशकों की नजरें राज्य की बिजली कंपनी TANGEDCO की वित्तीय स्थिति पर भी रहेंगी। राज्य ने बिजली सब्सिडी के लिए ₹18,860 करोड़ का एक बड़ा हिस्सा आवंटित किया है, जो बढ़ती ऊर्जा मांग और ऑपरेशनल लागत के कारण लंबे समय से चले आ रहे वित्तीय दबाव को दर्शाता है। हितधारकों के लिए, इन बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के एग्जीक्यूशन की टाइमलाइन एक महत्वपूर्ण फैक्टर रहेगी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि सोलर रूफटॉप को बढ़ावा देने के लिए सिर्फ सब्सिडी काफी नहीं है, बल्कि राज्य की यूटिलिटी, ग्राहकों और इंस्टॉलर्स के बीच बेहतर समन्वय की भी ज़रूरत है। निवेशक यह भी देखेंगे कि BESS पॉलिसी प्राइवेट कैपिटल को कैसे आकर्षित करती है और क्या नए ग्रिड अपग्रेड नए सोलर कैपेसिटी को बिना किसी अतिरिक्त लागत के एकीकृत कर पाते हैं।
