Sterling & Wilson Renewable Energy के शेयर गुरुवार को **7.31%** गिरकर **₹221.90** पर आ गए। यह गिरावट तब आई जब कंपनी ने **₹13,000 करोड़** की रिकॉर्ड ऑर्डर बुक का ऐलान किया। निवेशकों को इन ऑर्डर्स के रेवेन्यू में बदलने की रफ़्तार पर चिंता है, जिसकी वजह से Q1 FY27 में **36%** मुनाफे में बढ़ोतरी के बावजूद बिकवाली का दबाव बना रहा।
शेयर में आई भारी गिरावट
Sterling & Wilson Renewable Energy के शेयरों में गुरुवार को भारी गिरावट देखने को मिली। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर शेयर 7.31% लुढ़ककर ₹221.90 पर बंद हुए। इस दौरान स्टॉक में ट्रेडिंग वॉल्यूम भी काफी ज्यादा रहा, जिसमें 10.67 लाख से ज्यादा शेयर ट्रेड हुए। यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही के अंत तक ₹13,000 करोड़ के अब तक के सबसे बड़े अन-एग्जीक्यूटेड ऑर्डर वैल्यू का खुलासा किया था।
मिस्र में बड़ा प्रोजेक्ट और ऑर्डर बुक में बढ़ोतरी
कंपनी की ऑर्डर वैल्यू में बढ़ोतरी का एक बड़ा हिस्सा अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट से आया है। Sterling & Wilson ने मिस्र (Egypt) में वेस्ट मिन्या सोलर पावर प्रोजेक्ट के लिए 50-50 की ज्वाइंट वेंचर (JV) में एंट्री की है। इस प्रोजेक्ट की अनुमानित वैल्यू USD 560 मिलियन है और इसमें 1,000 MW-AC का सोलर फोटोवोल्टिक प्लांट बनाना शामिल है, जिसमें 600 MWh की बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम भी होगी। यह डील कंपनी के भविष्य के काम को काफी बढ़ाएगी, लेकिन एक नए बाजार में सफल एग्जीक्यूशन की चुनौती भी होगी।
फाइनेंशियल पोजीशन और ऑपरेशनल ग्रोथ
ऑर्डर नंबर्स के अलावा, कंपनी ने Q1 FY27 के लिए प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में पिछले साल की तुलना में 36% की बढ़ोतरी दर्ज की है। इसके ऑपरेशंस एंड मेंटेनेंस (O&M) सेगमेंट ने भी मजबूत प्रदर्शन किया, जिसमें पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 40% का रेवेन्यू ग्रोथ रहा। बैलेंस शीट की बात करें तो, कंपनी ने इस तिमाही में अपने टर्म लोन को लगभग ₹160 करोड़ कम किया है, जिससे इंटरेस्ट कॉस्ट कम करने में मदद मिली है। फिलहाल, कंपनी के पास डोमेस्टिक इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) के लिए लगभग ₹7,900 करोड़ का ऑर्डर बुक है, जिसमें ग्रॉस मार्जिन 9% से 10% के बीच बना हुआ है।
निवेशकों की चिंता और मार्केट का रुख
इन ऑपरेशनल सुधारों के बावजूद, शेयर पिछले बारह महीनों में 32% से ज्यादा गिर चुका है। यह अपने 52-वीक हाई ₹341 से काफी नीचे ट्रेड कर रहा है। यह दिखाता है कि मार्केट सिर्फ ऑर्डर बुक के साइज के बजाय, इन ऑर्डर्स को असल रेवेन्यू में बदलने की रफ़्तार को ज्यादा अहमियत दे रहा है। चूंकि कंपनी कैपिटल-इंटेंसिव रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में काम करती है, निवेशक उन प्रोजेक्ट्स को लेकर सावधान रहते हैं जिन्हें पूरा होने में लंबा समय लगता है या जिनमें रेवेन्यू रिकग्निशन में देरी होती है।
शेयरहोल्डर्स के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन की रफ़्तार होगी। रिकॉर्ड ₹13,000 करोड़ के बैकलॉग को रेवेन्यू में बदलने, बढ़ती लागतों के बीच मैनेजमेंट की मार्जिन बनाए रखने की क्षमता और लोन कम करने की प्रगति पर भविष्य के अपडेट्स आने वाली तिमाहियों में मार्केट सेंटिमेंट को प्रभावित कर सकते हैं।
