भारत का सिंचाई क्षेत्र तेजी से डीजल से सोलर की ओर शिफ्ट हो रहा है। PM-KUSUM स्कीम के तहत अब **60%** पंप सोलर पर चल रहे हैं, जिसमें Corrit Energy जैसी कंपनियां किसानों को फंडिंग और तकनीक देकर बड़ा विस्तार कर रही हैं।
भारत के कृषि क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां किसान अब महंगे डीजल पंपों को छोड़कर सोलर सिस्टम को अपना रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में करीब 60% सिंचाई पंप अब सोलर पावर से चल रहे हैं, जो डीजल पर निर्भरता को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इसका मुख्य श्रेय सरकार की PM-KUSUM योजना को जाता है, जिसने किसानों को अपने खेतों में सोलर पैनल लगाने के लिए प्रोत्साहित किया है।
फाइनेंसिंग की चुनौती और प्राइवेट कंपनियों का रोल
सोलर लगाने का विचार अच्छा है, लेकिन व्यक्तिगत किसानों के लिए फंडिंग जुटाना एक बड़ी बाधा है। 2 मेगावाट के छोटे प्लांट के लिए भी कम से कम ₹8 करोड़ का कैपिटल एक्सपेंडिचर (CapEx) चाहिए होता है, जिसके लिए बैंक अक्सर किसानों को लोन देने में हिचकिचाते हैं। इस समस्या को सुलझाने के लिए गुरुग्राम स्थित Corrit Energy and Infra जैसी कंपनियां सामने आई हैं। ये कंपनियां किसानों के साथ जॉइंट वेंचर करती हैं, जिससे बैंक के मानकों के अनुसार फंडिंग मिलना आसान हो जाता है।
500MW का मेगा प्लान
फिलहाल, कंपनी 100 मेगावाट के प्रोजेक्ट्स चला रही है और अगले 18 महीनों में इसे 500 मेगावाट तक ले जाने का लक्ष्य है। कृषि क्षेत्र के अलावा, कंपनी स्टील और ऑटोमोबाइल जैसे भारी उद्योगों को भी सोलर समाधान मुहैया करा रही है। भविष्य में बैटरी स्टोरेज की अनिवार्यता को देखते हुए कंपनी की रणनीति अब ग्रिड-कनेक्टेड सोलर प्लांट्स में बैटरी जोड़ने पर भी है। निवेशकों के लिए अब कंपनी के प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन और कर्ज प्रबंधन पर नजर रखना जरूरी होगा।
